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क्रमिक अनशन जारी: आय सीमा के पेच में फंसे करुणामूलक नौकरी के हजारों मामले

Sun, 28 Nov 2021 10:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 28 Nov 2021 10:24 PM IST
सार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विभागों में करुणामूलक के पांच हजार से अधिक मामले नहीं सुलझ पाए हैं। वर्तमान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी में रहते मृत्यु होती है तो परिवार की सालाना आय तय सीमा से अधिक हो रही है।

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Himachal News: pension income and  employment on compassionate grounds in himachal pradesh
हिमाचल प्रदेश सरकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नौकरी के हजारों मामले परिवार की आय सीम के पेच में फंसे हैं। सरकार ने परिवार की सालाना आय डेढ़ लाख निर्धारित की है। इस कारण परिवार की आय सीमा अधिक होने के कारण हजारों मामले अटके हैं। दूसरी ओर, करुणामूलक नौकरी नौकरी पाने की बाट जोह रहे प्रभावित लोग नौ दिन से अधिक समय से क्रमिक अनशन पर हैं, लेकिन उनके प्रतिनिधियों ने आज तक सरकार से संवाद कर उनका मामला नहीं निपटाया है। लिहाजा, प्रभावित लोग करुणामूलक नौकरी की मांग के लिए आंदोलन करने पर मजबूर हैं।  

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विभागों में करुणामूलक के पांच हजार से अधिक मामले नहीं सुलझ पाए हैं। वर्तमान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी में रहते मृत्यु होती है तो परिवार की सालाना आय तय सीमा से अधिक हो रही है। यही एक प्रमुख कारण है, जो सरकार को करुणामूलक नौकरी देने में बाधा आ रही है। सरकार ने एक बार आय सीमा बढ़ाकर डेढ़ लाख की थी, लेकिन इससे भी करुणामूलक नौकरी के मामले नहीं सुलझ सके। 
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हिमाचल करुणामूलक संघ के नेताओं ने मांग की है कि करुणामूलक नौकरी के लंबित सभी मामलों एकमुश्त सुलझाया जाए, जिससे सभी को एक साथ नौकरी मिल सके। विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए करुणामूलक को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने करुणामूलक नौकरी के लंबित मामले सुलझाने को कमेटी गठित करने की घोषणा पहले ही कर दी है। अब देखना है कि सरकार करुणामूलक नौकरी के मामले सुलझाने में कितना समय लगाती है। 

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