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स्वास्थ्य: पक्षाघात के 20 फीसदी मरीज 40 से कम उम्र के, स्कूली बच्चे भी आ रहे चपेट में

Mon, 25 Dec 2023 01:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुमित ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
सुमित ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 25 Dec 2023 01:40 PM IST
सार

विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के स्ट्रोक से बचने के लिए लोगों को अपने बीपी का ख्याल रखना चाहिए।

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himachal news: Paralysis 20 percent patients are less than of age 40 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पक्षाघात (पैरालिसिस) के मरीजों में 20 फीसदी 40 से कम आयु के सामने आ रहे हैं। यह कहना है अटल सुपर स्पेशिलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा उनका कहना है कि बुजुर्गों के साथ ही अब युवा भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जो चिंताजनक है। इनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। अटल सुपर स्पेशिलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना में न्यूरोलॉजी विभाग में रोजाना प्रदेशभर से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। इनमें अधिकांश मरीजों में मुंह के टेढ़ा होना, एक हाथ व पैर का कमजोर या सुन्न, वाणी का अस्पष्ट होना जैसे लक्षण होते हैं।

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स्ट्रोक से इस प्रकार करें बचाव
विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के स्ट्रोक से बचने के लिए लोगों को अपने बीपी का ख्याल रखना चाहिए। वहीं शुगर का समय पर उपचार करवाना चाहिए। धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। 
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दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मृत्यु का कारण
स्ट्रोक दुनियाभर में मानव जाति के लिए दूसरा सबसे बड़ा मृत्यु का कारण बनकर उभरा है। यहां तक कि भारत में भी ट्यूबरक्लॉज जैसी संक्रामक बीमारी की तुलना में स्ट्रोक से अधिक लोग मरते हैं। अटल सुपर स्पेशिलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (चमियाना) के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया कि देशभर में हर 20 सेकंड में एक व्यक्ति पक्षाघात (स्ट्रोक) का शिकार होता है। वहीं हर 2 मिनट में एक व्यक्ति की इस बीमारी से मौत होती है।
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एप के जरिये स्ट्रोक सेंटर की मिलेगी जानकारी
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मरीजों को पक्षाघात होता है, उनके तीमारदारों को मरीज को नजदीकी सेंटर ले जाने की जानकारी नहीं होती है। लिहाजा बड़े अस्पतालों में लाने के कारण कई बार मरीज की हालत बिगड़ जाती है। हालांकि गूगल प्ले पर एचपी टेलीस्ट्रोक नाम की एप है जिसमें हिमाचल के 17 नजदीकी केंद्रों की जानकारी है। चूंकि इस बीमारी के होने पर मरीज को चार घंटों के भीतर अस्पताल में पहुंचना जरूरी है तो ऐसे में जानकारी होने से मरीजों को अधिक लाभ होगा। वहीं स्थिति भी गंभीर नहीं होगी।


इस तरह के लक्षण होने पर मरीज को नजदीकी अस्पताल जहां पर सीटी स्कैन की सुविधा है, वहां पर उपचार के लिए आना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 17 पक्षाघात केंद्रों (स्ट्रोक सेंटर) में मरीजों का मुफ्त में उपचार किया जाता है। यहां पर एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ और एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को इस बीमारी के इलाज में दक्ष बनाया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में चार से पांच मरीज इस तरह की समस्या लेकर आ रहे हैं, जिन्हें वार्डों में दाखिल करके चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है। - डॉ. सुधीर शर्मा, अध्यक्ष,  सुपर स्पेशिलिटी विभाग न्यूरोलॉजी  

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