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Kangra Airport: अगर कांगड़ा एयरपोर्ट कहीं और शिफ्ट किया गया तो 15 साल तक खिंच जाएगा प्रोजेक्ट
Wed, 05 Jul 2023 12:23 PM IST
अरविन्द ठाकुर
विपिन चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
विपिन चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 05 Jul 2023 12:23 PM IST
सार
एक्सपर्ट कमेटी ने निष्कर्ष निकाला है कि अगर एयरपोर्ट का निर्माण कहीं और नए सिरे से किया जाता है तो इस पर खर्च भी बहुत आएगा। कई विभागों से एनओसी लेने और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के चलते यह प्रोजेक्ट 15 से 20 साल तक खिंच जाएगा।
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गगल एयरपोर्ट कांगड़ा।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अगर कांगड़ा एयरपोर्ट को कहीं और शिफ्ट किया गया तो यह बड़ा प्रोजेक्ट 15-20 साल तक आगे खिसक जाएगा। नया एयरपोर्ट बनाने का खर्च भी कई गुना बढ़ जाएगा। साथ ही पुरानी हवाई पट्टी भी पूरी तरह से बेकार हो जाएगी। यह निष्कर्ष गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए लोगों के बीच पहुंच कर उनकी राय जानने के लिए गठित की गई सामाजिक प्रभाव आकलन कमेटी की जून में सौंपी सर्वे रिपोर्ट में निकला है। जानकारी के अनुसार गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण को लेकर सामाजिक प्रभाव आकलन कमेटी का गठन किया गया था।
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इस कमेटी में ग्राम पंचायत गगल और रछियालु के पंचायत प्रधानों के अलावा प्रदेश में विभिन्न ओहदों पर तैनात विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट को जून में प्रदेश सरकार को सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि सर्वे के दौरान लोगों ने कई प्रकार के तर्क दिए थे, जिनमें कहा गया था कि गगल एयरपोर्ट का निर्माण लंज या बौडक्वालु में किया जा सकता है। हवाई पट्टी को गगल बाजार की तरफ लाने के बजाय ढुगियारी से धर्मशाला की तरफ करने की भी बात कही गई थी।
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लेकिन एक्सपर्ट कमेटी ने इन सभी तथ्यों पर निष्कर्ष निकाला है कि अगर एयरपोर्ट का निर्माण कहीं और नए सिरे से किया जाता है तो इस पर खर्च भी बहुत आएगा। कई विभागों से एनओसी लेने और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के चलते यह प्रोजेक्ट 15 से 20 साल तक खिंच जाएगा। वहीं अगर इसका निर्माण धर्मशाला की ओर किया जाता है तो सामने पहाड़ होने के कारण जहाजों को लैंड और टेकऑफ करने में भी कई प्रकार की दिक्कतें पेश आ सकती हैं।
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कमेटी ने निष्कर्ष निकाला है कि गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए 147 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की जानी है, जोकि अन्य क्षेत्रों में इसके नए सिरे से निर्माण करवाने की अपेक्षा बहुत कम है। अगर इसका निर्माण कहीं और किया जाता है तो अधिगृहित की जाने वाली भूमि का दायरा भी काफी बढ़ जाएगा। इन सभी प्रभावों को देखते हुए एक्सपर्ट कमेटी ने निष्कर्ष निकाला है कि एयरपोर्ट के विस्तार के लिए गगल स्थित हवाई पट्टी को ही लंबा और चौड़ा किया जाना सबके हित में है। संवाद
कमेटी में इन लोगों को किया गया है शामिल
गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए गठित की गई सामाजिक प्रभाव आकलन कमेटी में चेयरमैन का दायित्व डॉ. संजय कुमार धीमान को सौंपा गया है। उनके साथ पुनर्वास विशेषज्ञ बलवान चंद, सोशल साइंटिस्ट प्रो. विशाल सूद और डॉ. शशि पूनम को शामिल गया है। टेक्निकल एक्सपर्ट के रूप में विनोद कुमार पुनियाल के अलावा गगल और रछियालू ग्राम पंचायत के प्रधानों को इस कमेटी में जगह दी गई है।
गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण के प्रभाव जांचने के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट को सौंप दिया है, जिसे अब आगामी कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार को भेज दिया है। - डॉ. निपुण जिंदल, जिलाधीश कांगड़ा