डीसी चंबा ने माफी मांगी, मीडिया को धमकाने के मामले की होगी जांच: सीएम
डीसी चंबा की ओर से मीडिया को धमकाने के मामले में मुख्यमंत्री ने भी संज्ञान लिया है। परिधि गृह धर्मशाला में प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी। शिलान्यास पट्टिका पर विधायक की जगह डीसी का नाम अंकित होने के मामले में डीसी चंबा ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांग ली है।
सीएम ने कहा कि डीसी चंबा की ओर से मीडिया को धमकाने के मामले की उनको जानकारी नहीं है। अब पता चला है तो मामले की जांच की जाएगी। गौरतलब है कि डीसी चंबा ने एक शिलान्यास पट्टिका पर स्थानीय विधायक की जगह अपना नाम लिखवा दिया था।
अमर उजाला में गलती उजागर करती खबर प्रकाशित होने के बाद चंबा का जिला प्रशासन मनमानी पर उतर आया था। प्रशासन ने जिला लोक संपर्क अधिकारी के माध्यम से अमर उजाला को एक ऐसी खबर पर नोटिस भिजवा दिया, जिसके प्रकाशित होने के बाद उस पर असर हुआ और डीसी ने गलती मानते हुए उसमें सुधार भी कर लिया। तथ्यों के साथ खबर प्रकाशित करने के बावजूद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास किया गया।
दरअसल, 29 जुलाई को अमर उजाला ने शिलान्यास पट्टिका से सदर विधायक का नाम गायब शीर्षक से खबर प्रकाशित कर उपायुक्त कार्यालय चंबा के समीप बहुउद्देश्यीय सुविधा केंद्र के शिलान्यास के दौरान शिलान्यास पट्टिका में सदर विधायक का नाम न होने की जानकारी को सार्वजनिक किया था। हैरानी की बात है कि शिलान्यास पट्टिका में जहां कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद किशन कपूर का नाम तो था लेकिन स्थानीय विधायक की जगह उपायुक्त विवेक भाटिया का नाम अंकित किया गया था। सांसद ने विधायक का नाम न होने पर सवाल भी उठाया।
स्थानीय नेताओं ने भी सरकार तक शिकायत करने की तैयारी की तो प्रशासन ने गलती मानते हुए पट्टिका में स्थानीय विधायक का नाम जुड़वा दिया। अमर उजाला के खबर को प्रकाशित करने और कारगुजारी के सार्वजनिक होने से तिलमिलाए डीसी ने पत्रकार वार्ता के दौरान अशोभनीय व्यवहार किया था और नोटिस भेजकर बौखलाहट निकालने का प्रयास किया। चूंकि अमर उजाला हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के लाखों पाठकों का भरोसा है और वह निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकारिता करता रहा है।
नोटिस में पूर्व में प्रकाशित हुए एक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के शराब पार्टी करने संबंधी खबर का भी उल्लेख कर उसे गलत बताने का प्रयास किया गया। जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व डीजीपी सीताराम मरडी सार्वजनिक मंचों व मीडिया के सामने इस घटना को सत्यापित कर चुके थे।
खास बात यह है कि चंबा जिला का प्रशासन प्रेस की स्वतंत्रता से इस कदम बौखलाया कि कोरोना काल के शुरूआती दौर में क्वारंटीन सेंटरों की दुर्दशा की खबरों को प्रकाशित करने पर पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई गई थी। बाद में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मामले में दखल देते हुए पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने के लिए कहना पड़ा था।