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Dalai Lama: तिब्बती लोगों के दिलों में बसे धर्म को नष्ट नहीं कर सकता चीन
Tue, 14 Jun 2022 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Tue, 14 Jun 2022 05:00 AM IST
सार
दलाईलामा ने कहा कि इस पृथ्वी पर बहुत सारे धर्म और परंपराएं हैं। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और मानता हूं कि सब अच्छे हैं। भारत में ही देखें तो सभी लोग एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं।
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बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा है कि चीन तिब्बती लोगों के दिलों में बसे धर्म को नष्ट नहीं कर सकता है। चीन का प्रयास है कि बुद्धजन को नष्ट कर दें। तिब्बती बौद्ध धर्म और संस्कृति को खत्म कर दिया जाए। लेकिन चीन तिब्बती लोगों के दिल में बसे धर्म को कैसे नष्ट कर सकता है। हमने हजारों वर्षों से इस परंपरा को संजोकर रखा है। आज वैज्ञानिक भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं और अध्ययन के लिए हमारे पास आ रहे हैं।
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सोमवार को मुख्य बौद्ध मंदिर मैक्लोडगंज में त्रिगुण पावन बुद्ध पूर्णिमा पर आचार्य जे चोंग्खापा रचित ‘बोधिपथ क्रम पिंडार्थ एवं अवलोकितेश्वर जिनसागर’ के दो दिवसीय अभिषेक के पहले दिन दलाईलामा ने कहा कि इस पृथ्वी पर बहुत सारे धर्म और परंपराएं हैं। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और मानता हूं कि सब अच्छे हैं। भारत में ही देखें तो सभी लोग एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं। यह बहुत अच्छी बात है। मैं बौद्ध भिक्षु हूं।
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उन्होंने कहा कि जब हम तिब्बत से भारत आए थे तो पंडित जवाहर लाल नेहरू से अनुरोध किया था कि हम तिब्बतियों की अपनी भाषा है, अपनी लिपि है। हमारे बच्चों को तिब्बती पढ़ाने के लिए अलग से विद्यालय की आवश्यकता है। फिर हमें विद्यालय की अनुमति मिली थी।
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