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हिमाचल: मुकेश अग्निहोत्री बोले- मंदिरों के पैसे से गरीबों के इलाज और स्कूल फीस की मदद करेगी सरकार

Mon, 31 Aug 2026 08:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 31 Aug 2026 08:36 PM IST
सार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में दी। वह श्री चिंतपूर्णी जी से विधायक सुदर्शन बबलू की ओर से शून्यकाल के दौरान उठाए गए मामले का जवाब दे रहे थे।

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Himachal: Govt to use temple funds to help the poor with medical treatment and school fees.
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शक्तिपीठों और बड़े मंदिरों में चढ़ावे के रूप में जमा राशि का उपयोग अब गरीब लोगों के इलाज और जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस में मदद के लिए किया जा सकेगा। संबंधित जिलों के उपायुक्त अपने क्षेत्र के पात्र गरीब परिवारों की सहायता के लिए इस राशि का इस्तेमाल कर सकेंगे। मंदिरों के चढ़ावे के उपयोग को लेकर न्यायालय के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने विधि विभाग से इस संबंध में राय मांगी थी। विधि विभाग की ओर से सरकार को दी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मंदिरों में उपलब्ध चढ़ावे की राशि से जरूरतमंद और गरीब लोगों के इलाज के साथ-साथ गरीब परिवारों के बच्चों की स्कूल फीस में सहायता की जा सकती है।

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हालांकि, न्यायालय की ओर से मंदिरों के धन का उपयोग विज्ञापन जारी करने और मंदिर न्यास के अधिकारियों के लिए वाहन खरीदने पर रोक लगाई गई है। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में दी। वह श्री चिंतपूर्णी जी से विधायक सुदर्शन बबलू की ओर से शून्यकाल के दौरान उठाए गए मामले का जवाब दे रहे थे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली राशि का उपयोग जनहित और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए और सरकार इस दिशा में कानूनी प्रावधानों के तहत कदम उठाएगी। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष रिव्यू पिटीशन भी दायर करेगी। सरकार न्यायालय के आदेश और विधि विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

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सफेदे पर प्रति पेड़ 90 और ट्रक पर 500 रुपये फीस
ऊना से विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शून्यकाल के दौरान सफेदे और पापुलर की खेती करने वाले किसानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सफेदे के एक पेड़ पर सरकार ने 90 रुपये फीस लगा दी है। लकड़ी काटकर बेचने के लिए ले जाने पर 500 रुपये प्रति ट्रक फीस भी वसूली जा रही है। पेड़ कटान की मंजूरी की प्रक्रिया जटिल होने से किसानों का एक ट्रक सफेदे की लकड़ी पर खर्च करीब 3000 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने किसानों के हित में पेड़ कटान की प्रक्रिया सरल बनाने की मांग की।

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