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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: cold desert Lahaul Spiti animal yak survive in minus forty degree temperature

शीत मरुस्थल: खेत जोतता है माइनस 40 डिग्री तापमान में रहने वाला ये पशु, ऊन से बनता है नर्म गलीचा

Wed, 23 Nov 2022 05:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, उदयपुर (लाहौल-स्पीति) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 23 Nov 2022 05:05 PM IST
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सार
शीत मरुस्थल में पाए जाने वाले इस पशु की उम्र महज 18 वर्ष तक ही है जो बर्फ में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहता है।
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Himachal News: cold desert Lahaul Spiti animal yak survive in minus forty degree temperature
याक - फोटो : संवाद

विस्तार

शीत मरुस्थल स्पीति घाटी में आज भी लोगों ने गलीचे के निर्माण व खेत जोतने के लिए याक पाल रखे हैं। इसके ऊन (खुलु) से आज भी नर्म गलीचा तैयार किया जाता है। वहीं खेतों की बिजाई के लिए भी आज के इस आधुनिकता के दौर में स्पीति घाटी के लोसर, क्यामो, हंसा, क्याटो और चिच्चम के साथ पिनवैली में नर और मादा याक देखे जा सकते हैं।



शीत मरुस्थल में पाए जाने वाले इस पशु की उम्र महज 18 वर्ष तक ही है जो बर्फ में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहता है। बताया जा रहा है यह एक प्रकार की गाय जाति का जंगली पशु है जिसकी कुछ जातियां पालतू हैं। लेकिन कुछ अभी भी जंगली अवस्था में ही जंगलों में ही रहती हैं। भारत में स्पीति के साथ उतरी लद्दाख के आसपास में याक 15 से 20 हजार फुट की ऊंचाई पर पाया जाता है। 


याक भारत के उतरी क्षेत्रों में पाया जाने वाला जंतु है। इनके शरीर की बनावट ऐसी है जो शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में जीवित रह सकते हैं। घास और छोटे पौधे इसका आहार है। तिब्बती लोगों के लिए याक एक बेहद उपयोगी पशु है और इसके दूध का सेवन करते हैं। याक सवारी और सामान ढोने के काम में भी इस्तेमाल होता है। स्पीति से लोसर गांव के वीर वेद्यया और क्यामो के तंजिन ने बताया कि स्पीति घाटी के लोसर, क्यामो, हंसा, क्याटो, चिच्चम और पिनवैली में लोग आज भी याक को पाल रहे हैं। 

याक
याक - फोटो : संवाद

उन्होंने बताया कि याक के ऊन (खुलु) से गलीचा तैयार करने और उसे खेत जोतने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके ( खुलु) से रस्सी भी बनाई जाती है। वीर वेद्यया ने बताया कि मादा याक 257 और 270 दिनों में एक बच्चे को जन्म देती है।

तंजिन ने बताया कि याक ठंडे और बर्फीले क्षेत्र में पाया जाने वाला ऐसा पशु है, जो जमाव बिंदु से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी जिंदा रहता है। उन्होंने बताया स्पीति घाटी में याक को दिसंबर अंत तक माइनस तापमान के बावजूद रिहायशी इलाकों से दूर जंगल में खुला छोड़ा जाता है। 

याक एक पशु है जो तिब्बत के ठंडे तथा विरान पठार के अलावा नेपाल व उत्तरी भारत में पाया जाता है। यह जानवार काला, भूरा, सफेद या धब्बेदार रंग का होता है। इसका शरीर घने, लंबे और खुरदरे बाल होते हैं। इसकी ऊन से बना गलीचा बैठने या सोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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