बारिश ने मचाई तबाही, दुकानों में घुसा मलबा, दो स्कूटर भी बहे
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हिमाचल के मंडी-सैगली-पराशर मार्ग पर मंडी से करीब 29 किमी दूर सेगली बागीनाला में आई बाढ़ ने खूब कहर बरपाया है। वीरवार देर रात नाला उफान पर आ गया। इससे साथ लगती जमीन धंस गई और छह दुकानें पानी के साथ आए मलबे और पत्थरों की चपेट में आ गईं। इससे दुकानों को काफी नुकसान पहुंचा है और अंदर रखा सामान तबाह हो गया है।
जबकि, बागीखड्ड पर निर्माणाधीन पुल को भी नुकसान हुआ है। भारी मलबे में कानू गांव के लिए जाने वाले फुट ब्रिज भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। श्मशानघाट को भी नुकसान हुआ है। जबकि, एक मोटरसाइकिल और स्कूटर भी मलबे में दब गए हैं।
इस घटना के बाद धार्मिक पर्यटन स्थल पराशर मार्ग भी बंद चल रहा है। बाढ़ के वक्त दुकानों में कोई नहीं था। सभी कारोबारी अपने घरों को चले गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कर दिए। जेसीबी के माध्यम से मलबे को हटाया जा रहा है। मार्ग बहाल करने के प्रयास जारी हैं।
पहले भी बरप चुका है कहर
पंचायत प्रधान हरि सिंह और वार्ड मेंबर भगत राम ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को उचित मुआवजे की गुहार लगाई है। इनका कहना है कि देर रात भारी बारिश से नाला उफान पर आ गया।
तेज बहाव में पानी के साथ पत्थर और मलबा दुकानों में घुस गया। संबंधित अफसरों को सूचित किया जा चुका है। कहा कि छह दुकानें और दो दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। जबकि पराशर झील के लिए जाने वाला रास्ता भी बंद है।
एसडीएम सदर पूजा चौहान ने बताया कि घटना वीरवार रात की है। मूसलाधार बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव तेज हो गया। जिससे नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि गांव में आए मलबे को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। पराशर मार्ग पर यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रभावितों में नरेश कुमार ने कहा कि उनकी दुकान में मलबा घुस गया है। सब्जी का काम करते हैं। सारा सामान खराब हो गया है। किराना कारोबारी राम सिंह और जयराम ने कहा कि उनका काफी सामान तबाह हो गया है।
जबकि टी स्टाल के मालिक दौलत राम और कीतानंद की सब्जी की नुकसान हुआ है। जबकि गुड्डू राम का स्कूटर और बाइक मलबे में दब गया है। प्रभावितों ने नियमानुसार मुआवजे की मांग की है।
इस नाले के आसपास पहले आबादी रहती थी। लोगों के मकान भी थे। लेकिन, 2013 और 2014 में नाले ने बरसात के मौसम में भारी तबाही मचाई। जिसके बाद यहां रहने वाले पलायन कर गए। अब यहां दुकानें हैं। पराशर जाते वक्त अक्सर पर्यटक और स्थानीय लोग यहां रुकते हैं।