नियमों को नजरअंदाज कर बोर्ड अध्यक्ष बनाए थे सुरेंद्र ठाकुर
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हिमाचल प्रदेश भवन निर्माण एवं अन्य कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से भले ही कर्मचारी नेता सुरेंद्र ठाकुर को अब हटा दिया गया हो लेकिन आठ महीने पहले नियमों को नजरअंदाज कर उनकी नियुक्ति अब भी सवालों के घेरे में है। सरकारी सेवा से इस्तीफा दिए बिना ही सुरेंद्र को अध्यक्ष बना दिया गया था। 14 मई 2018 को बाकायदा इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए सीसीए रूल 1965 के तहत राजनीतिक पद पर तैनाती से पहले इस्तीफा देना अनिवार्य है। हालांकि, सुरेंद्र ठाकुर बोर्ड में अध्यक्ष पद नहीं संभाल पाए। सरकार ने उन्हें बोर्ड का अध्यक्ष तो बना दिया था लेकिन न वीआरएस दी और न ही एक्सट्रा ऑर्डनरी लीव मंजूर की।
सीसीए रूल 1972 में स्पष्ट है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को बीमारी पर, शिक्षा ग्रहण करने या अन्य जगह नौकरी करने के लिए दो साल की अवधि की एक्सट्रा ऑर्डनरी लीव दी जा सकती है। राजनीतिक पद पर तैनाती के लिए यह अवकाश नहीं दिया जा सकता।
सुरेंद्र ठाकुर कहते हैं कि उन्होंने कभी बोर्ड अध्यक्ष पद के लिए आवेदन नहीं किया। उनके नाम की सिफारिश भामसं और संगठन के केंद्रीय नेतृत्व ने की थी। उनका कहना है कि इस मामले पर वह कु छ नहीं कहेंगे। वह शीघ्र ही भामसं के केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष अपनी बात रखेंगे।