फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   Himachal: In this village even today the field is ploughed with a single bull, sleeping on a cot is prohibited

हिमाचल: इस गांव में आज भी एक ही बैल से होती है खेत की जुताई, चारपाई पर सोना भी मना, जानिए क्या है वजह

Sat, 06 Sep 2025 01:37 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, पांगी/चंबा।
अमर उजाला नेटवर्क, पांगी/चंबा। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 06 Sep 2025 01:37 PM IST
सार

यह भारत का शायद पहला और एकमात्र ऐसा गांव है, जहां आज भी किसान दो बैलों की जोड़ी के बजाय सिर्फ एक बैल से अपने खेतों को जोतते हैं। 

विज्ञापन
Himachal: In this village even today the field is ploughed with a single bull, sleeping on a cot is prohibited
मिंधल गांव में एक बैल से खेत की जोताई। - फोटो : संवाद

विस्तार

आधुनिकता की दौड़ में जब दुनिया बदल रही है, खेतों की जुताई ट्रैक्टरों व अन्य मशीनों से हो रही हैं और परंपराएं धुंधली पड़ती जा रही है, तब भारत के उत्तरी कोने में हिमाचल प्रदेश की गोद में बसी पांगी घाटी का मिंधल गांव एक अनूठी विरासत को संजोए हुए है। यह परंपरा सबको हैरान कर देती है। यह भारत का शायद पहला और एकमात्र ऐसा गांव है, जहां आज भी किसान दो बैलों की जोड़ी के बजाय सिर्फ एक बैल से अपने खेतों को जोतते हैं। मान्यता के अनुसार यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक दैवीय वरदान है, जिसके पीछे लगभग 2,000 साल पुरानी एक अद्भुत कथा छिपी है। जानिए...

विज्ञापन

मिंधल माता मंदिर के मुख्य चेला ने ये कहा
मिंधल माता मंदिर के मुख्य चेला (ठाठड़ी ) करतार सिंह ने बताया कि मिंधल पंचायत में एक भटवास नाम का गांव हुआ करता था।  लगभग 2,000 साल पहले इस गांव में घुंगती नाम की एक विधवा महिला अपने सात पुत्रों के साथ एक पुरानी कोठी (जिसे पंगवाली में 'घ्रण' कहते हैं) में रहती थी। भाद्रपद महीने के एक दिन जब  सुबह घुंगती अपने चूल्हे से राख निकाल रही थी तो उसने देखा कि राख के बीच से एक छोटी सी पिंडी बाहर निकल रही है। उसने इसे एक साधारण पत्थर का टुकड़ा समझकर कड़छी से वापस अंदर दबा दिया। यह सिलसिला एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार सात दिनों तक चलता रहा। सातवें दिन की सुबह विधवा ने अपने सभी सातों पुत्रों को खबल नामक स्थान पर हल जोतने के लिए भेज दिया और खुद घर पर उनके लिए खाना बनाने लगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

चूल्हे को फाड़कर प्रकट हुईं मिंधल माता
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब वह फिर से चूल्हे से राख निकालने लगी, तो उस छोटी सी शिला ने अचानक अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दिया और चूल्हे को फाड़कर प्रकट हो गई। साक्षात देवी के रूप में मिंधल माता ने विधवा घुंगती को दर्शन दिए और कहा, 'हे घुंगती! मैंने तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न होकर तुम्हारे घर में प्रकट होने का निश्चय किया था, लेकिन तुमने अज्ञानतावश सात दिनों तक मेरा उपहास किया और मेरी शिला को भूमि में दबा दिया। तुम दंड की भागी हो।' स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मां ने घुंगती की भक्ति को देखते हुए उसे एक श्राप और एक वरदान दिया। वरदान के रूप में माता ने वरदान दिया कि आज के बाद मिंधल गांव में हमेशा एक बैल से खेती होगी और अनाज पीसने के लिए सिर्फ आधी चक्की (घराट) की ही जरूरत पड़ेगी। श्राप के तौर पर माता ने कहा कि मिंधल गांव का कोई भी व्यक्ति चारपाई पर नहीं सोएगा और भटवास गांव के पीछे जो भी परिवार घर बनाएगा, वह केवल मिट्टी का ही होगा, पक्का नहीं होगा, न ही वह अपने घर में लिपाई-पुताई करेगा।

विज्ञापन

सातों बेटे अपने बैलों के साथ पत्थर की विशाल शिलाओं में बदल गए
यह सुनकर उपासक विधवा घबरा गई और अपने बेटों को सचेत करने के लिए खबल की ओर भागने लगी। लेकिन जैसे ही वह वहां पहुंची, उसके होश उड़ गए। उसके सातों बेटे अपने बैलों के साथ पत्थर की विशाल शिलाओं में बदल चुके थे। ये शिलाएं आज भी उस स्थान पर मौजूद हैं और इस चमत्कारी कथा की जीवंत साक्षी मानी जाती हैं। उस दिन के बाद से आज तक, मिंधल पंचायत के चार गांवों में मिंधल माता का यह वरदान एक अटूट परंपरा के रूप में जीवित है। किसान जब भी अपने खेतों में हल लेकर उतरता है, तो उससे पहले वह मिंधल माता की पूजा-अर्चना करता है और फिर एक ही बैल को हल में जोतकर अपनी खेती का काम शुरू करता है। यह दृश्य न केवल अद्भुत है, बल्कि आस्था की उस गहरी जड़ को भी दर्शाता है जो आधुनिकता की आंधी में भी अडिग है।

क्या कहती हैं ग्राम पंचायत मिंधल की प्रधान
ग्राम पंचायत मिंधल की प्रधान भाग देई ने बताया कि माता को सम्मान देने के लिए हर साल भाद्रपद महीने में यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में पांगी के अलावा जम्मू, कश्मीर और लाहौल से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि मिंधल गांव की इस अनूठी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को देखते हुए इसे भारत सरकार की कल्याणकारी प्रसाद योजना में शामिल किया जाए, ताकि इस स्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed