फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal In the Chichi forest even picking up dry cow dung is considered a religious offense

हिमाचल प्रदेश: चीची के जंगल में पेड़ काटना तो दूर, सूखा गोबर उठाना भी देव अपराध; जानें सबकुछ विस्तार से

Sat, 31 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा विश्वास भारद्वाज, चीची (ठियोग)।
विश्वास भारद्वाज, चीची (ठियोग)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 31 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में देवदारों के बीच फैला जंगल देव वन है। इसकी खास बात ये है कि यहां पेड़ काटना तो दूर, सूखी लकड़ी, पत्ते या यहां तक कि पशुओं का सूखा गोबर उठाना भी देव अपराध माना जाता है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Himachal In the Chichi forest even picking up dry cow dung is considered a religious offense
चीची जंगल - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राजधानी शिमला के ठियोग विकास खंड का चीची गांव। यहां घने देवदारों के बीच फैला जंगल सिर्फ एक जंगल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। यह जंगल स्थानीय लोगों के लिए देव वन है। एक ऐसा वन, जहां पेड़ काटना तो दूर, सूखी लकड़ी, पत्ते या यहां तक कि पशुओं का सूखा गोबर उठाना भी देव अपराध माना जाता है। ठियोग की देवरीघाट पंचायत के चीची देहात के अंतर्गत आने वाला यह जंगल चीची गांव, कुफर खनाल और शावग के बीच करीब 22 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है।

विज्ञापन

Himachal In the Chichi forest even picking up dry cow dung is considered a religious offense
चीची के जंगल - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

जंगल के भीतर कटे हुए पेड़ों के ठूंठ ढूंढे नहीं मिलते। इस जंगल की लकड़ी का प्रयोग स्थानीय लोगों के लिए प्रतिबंधित है। स्थानीय लोग इस जंगल से पशुओं का सूखा गोबर तक नहीं उठा सकते क्योंकि गोबर में देवदार की महीन पत्तियां चिपकी होती हैं। स्थानीय निवासी विक्रम शर्मा बताते हैं कि यह जंगल देवता चिखड़ेश्वर महाराज देवठी जनोग को समर्पित है और इसकी रखवाली का जिम्मा देवता ने गांव वालों को सौंप रखा है। जंगल के बीच में एक प्राकृतिक तालाब है, जहां घास चरने के बाद पशु पानी पीते हैं। कच्ची सड़क से सटे होने के बावजूद इस जंगल में आज तक कभी अवैध कटान नहीं हुआ। वन विभाग ठियोग के वन मंडल अधिकारी मनीष रामपाल का कहना है कि देव वन परंपरा जंगलों के सरंक्षण मेें बहुमूल्य योगदान दे रही है। इन जंगलों में लोगों की आवाजाही बहुत कम होती है। इसलिए जैव विविधता के लिए यह परंपरा बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

चीची के जंगल की लकड़ी सिर्फ दारण (मंदिर निर्माण) के लिए इस्तेमाल हो सकती है। सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। देवता महाराज ने खनाल परिवार को इस जंगल का सरंक्षण बनाया हुआ है। - भूपराम भारद्वाज, देवां, जनोग देवता
 
विज्ञापन

चीची जंगल से एक बार कुछ लोगों ने लकड़ी काटने की कोशिश की तो उनसे रस्सी, दराट और कुल्हाड़ी छीन कर देवता जनोग के मंदिर में जमा करवाई गई। आसपास आग लगी तो जंगल को बचाने के लिए लोग जमा हो गए। यह जंगल हमारी आस्था का प्रतीक है। - काहन सिंह नंबरदार, (खनाल परिवार के सदस्य)

आस्था की पहरेदारी में प्रकृति : प्रदेश के 468 देव वन आज भी अवैध कटान से पूरी तरह सुरक्षित
हिमाचल प्रदेश में आस्था और प्रकृति संरक्षण के प्रतीक 468 देव वन हैं। लोग स्वेच्छा से इन वनों की रक्षा करते आ रहे हैं। देव वनों की सबसे अधिक संख्या शिमला जिले में है, जहां 130 देव वन मौजूद हैं। इसके बाद कुल्लू जिले में 109 देव वन हैं। इन वनों में न तो अवैध कटान होता है और न ही वन्य जीवों का शिकार। यही कारण है कि ये वन जैव विविधता के सुरक्षित ठिकाने बने हुए हैं। पर्यावरणविद् डॉ. आरती गुप्ता का कहना है कि देव वन पारंपरिक संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण हैं, जहां बिना किसी सरकारी निगरानी के प्रकृति सुरक्षित है। देव वनों में कई दुर्लभ औषधीय पौधे और वन्य प्रजातियां पाई जाती हैं, जो अन्य क्षेत्रों में अब नहीं दिखतीं।

जिलावार देव वनों की संख्या
 
शिमला 130
कुल्लू  109
सोलन 38
चंबा 25
हमीरपुर  19
किन्नौर  16
मंडी 45
ऊना 14
लाहौल 7
बिलासपुर  17
कांगड़ा  19
कुल  468
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed