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नगर परिषद के ईओ को पद से हटाओ: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 05 Nov 2015 01:45 PM IST
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हाईकोर्ट ने मैकलोडगंज में अवैध तरीके से पेड़ कटान मामले में धर्मशाला नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी का पद देख रहे अधिकारी को तुरंत पद से हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी योग्य अधिकारी को नियुक्त किया जाए। नया कार्यकारी अधिकारी स्वतंत्र प्रभार के साथ नियुक्त किया जाना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने ये आदेश दिए। कोर्ट मित्र ने अदालत को बताया कि धर्मशाला क्षेत्र में वन कटान पर रोक के आदेशों का सरासर उल्लंघन हो रहा है। कार्यकारी अधिकारी का कार्य देख रहा अधिकारी इंजीनियर जोगिंद्र सिंह स्वयं भी उल्लंघन कर्ताओं में शामिल है।
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कोर्ट ने वन सचिव सहित डीसी कांगड़ा, मुख्य अरण्यपाल वन, अरण्यपाल वन कांगड़ा, चेयरमैन नगर परिषद और एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालती आदेशों की अवमानना करने पर कार्रवाई की जाए। एसपी कांगड़ा को रिपोर्ट के माध्यम से यह बताने के आदेश दिए कि दो जून 2015 से अभी तक कांगड़ा में पेड़ कटान के कितने मामले दर्ज किए गए।
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हाईकोर्ट के स्थगन आदेशों के बावजूद पेड़ कटान पर छपी खबर पर डीसी कांगड़ा के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होते हुए कहा कि खबर को पढ़ते ही उन्हें हरकत में आना चाहिए था। कोर्ट ने खेद जताया कि डीसी कांगड़ा ने पेड़ कटान पर छपी खबर पर कोई संज्ञान नहीं लिया।
वन विभाग के कानों में भी जूं तक नहीं रेंगी। कोर्ट ने डीसी कांगड़ा की ओर से अवैध पेड़ कटान मामले में पल्ला झाड़ने को दुर्भाग्यपूर्र्ण बताया। स्पष्ट किया कि डीसी किसी जिले का प्रशासनिक मुखिया होता है। सारा जिला प्रशासन उसके इर्द गिर्द घूमता है। ऐसे में जिले की प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखना उनका दायित्व होता है।
इसी तरह एसपी भी जिले की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होता है। कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थों के आग्रह पर हरे पेड़ों को काटने बाबत पारित स्थगन आदेशों को स्पष्ट करते हुए कहा कि खैर के पेड़ों को काटने पर स्थगन आदेशों का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। खैर के पेड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार काटे जा सकते हैं। मामले पर आगामी सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
जिप किलाड़ वार्ड को आरक्षित करने पर रोक- जिला परिषद के लिए होने वाले चुनाव में आरक्षित सीट से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसके तहत जिला परिषद किलाड़ वार्ड ब्लॉक पांगी (चंबा) महिलाओं के लिए इस बार भी आरक्षित कर दिया था। यह अधिसूचना 28 अक्तूबर को जारी हुई है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक चौहान की खंडपीठ ने देवेंद्र शर्मा की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ये आदेश दिए। याचिका में दिए गए तथ्यों के अनुसार सर्व प्रथम वर्ष 1995 में फिर 2000, 2005, 2010 और अब फिर उक्त सीट महिला के लिए ही आरक्षित कर दी गई है।
याचिका में दलील दी है कि लगातार सीट को महिला के लिए आरक्षित रखना कानूनी तौर पर गलत है। रोस्टर प्रणाली के हिसाब से हर श्रेणी के उम्मीदवारों को इस सीट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों तथा कानूनी प्रावधानों का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया पाया गया कि 28 अक्तूबर को जारी अधिसूचना पर स्थगन आदेश पारित करना जरूरी है।
इस कारण कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह का समय जवाब दायर करने के लिए देते हुए उक्त अधिसूचना पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई 16 नवंबर को होगी।