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HP High Court: दुष्कर्म के आरोपी को सुनाई 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार

Fri, 23 Dec 2022 06:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 23 Dec 2022 06:15 PM IST
सार

निचली अदालत ने दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी।

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himachal high court upholds conviction ten year imprisonment to man for rape
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को सुनाई गई सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने सिरमौर निवासी जगतार सिंह की अपील को खारिज कर दी। अदालत ने विशेष न्यायाधीश सिरमौर के निर्णय को सही ठहराया है। निचली अदालत ने जगतार सिंह को दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

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साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार सितंबर 2015 पीड़ित दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। आरोपी उस स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाता था। आरोपी ने पीड़ित को एक पैकेट किया और कहा कि इसे उसके कमरे में रख देना। जैसे ही पीड़ित पैकेट रखने के लिए कमरे में गई तो आरोपी पहले से ही कमरे में मौजूद था। उसने पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया।
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धमकी के कारण पीड़ित ने यह बात किसी को नहीं बताई। पांच-छह महीने बाद उसके पेट में दर्द हुआ। पीड़ित ने इस बारे में पुलिस को शिकायत की और अपना मेडिकल करवाया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पोक्सो की धारा 4 में मामला दर्ज किया। मामले की जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए 15 गवाह पेश किए।
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निचली अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दोषी के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। निचली अदालत ने दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को दोषी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि  निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों को सही तरीके से सराहा है। दोषी की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। 

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