रघुनाथ मंदिर के अधिग्रहण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा कुल्लू स्थित रघुनाथ मंदिर को अपने कब्जे में लेने के महेश्वर सिंह को जारी किए गए आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवालिया की खंडपीठ ने मंदिर के छड़ीबरदार और विधायक महेश्वर सिंह व दानवेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 26 जुलाई को जारी अधिसूचना के तहत कोई अगली कार्यवाही अमल में न लाई जाए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी महेश्वर सिंह और दानवेंद्र सिंह ने 26 जुलाई को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसके तहत कुल्लू के सुल्तानपुर स्थित रघुनाथ मंदिर को राज्य सरकार ने अपने अधीन कर लिया है।
कुल्लू के उपायुक्त को इस मंदिर का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उपायुक्त कुल्लू ने 26 जुलाई को ही नोटिस जारी कर महेश्वर सिंह को मंदिर संबंधी सारी संपत्ति, नकदी व कैश बुक्स सहित सात दिन में रघुनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष को सौंपने के लिए कहा था।
यह देवी-देवताओं का आशीर्वाद: महेश्वर
प्रार्थी गण की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह मंदिर निजी है, जिसका कब्जा महेश्वर सिंह के पास है। इसे सरकार अपने कब्जे में लेने का हक नहीं रखती है। इसके अलावा प्रार्थियों को अधिसूचना से पहले सारी प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर प्रदान नहीं किया गया।
आरोप लगाया है कि यह अधिसूचना राजनीति से प्रेरित है। कानून के प्रावधानों का उल्लंघन कर यह अधिसूचना जारी की गई है। याचिका में अधिसूचना और नोटिस को रद्द करने की कोर्ट से गुहार लगाई गई है। मामले पर सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर के अधिग्रहण पर हाईकोर्ट से 11 अगस्त तक स्टे मिलने पर कुल्लू शहर में देव समाज गदगद है। मंदिर के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि मैं सिर्फ ‘सत्यमेव जयते’ ही कहूंगा। उन्होंने कहा कि यह कुल्लू के देवी-देवताओं का आशीर्वाद है।
जिला परिषद सदस्य व महेश्वर सिंह के पुत्र हितेश्वर सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। पूरी उम्मीद है कि आगे भी पक्ष में ही फैसला आएगा। स्टे मिलने की सूचना से समर्थकों के चेहरे भी खिल गए हैं।