हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा, सेवानिवृत्ति के बाद डीपीसी की बैठक होने के बाद पदोन्नति का हक नहीं
प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई कर्मचारी केवल इस आधार पर पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता है कि वह पात्र पाया गया था।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई कर्मचारी केवल इस आधार पर पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता है कि वह पात्र पाया गया था। विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठक सेवानिवृत्ति के बाद हुई थी, इसलिए याचिकाकर्ता पदोन्नति का हकदार नहीं है। पदोन्नति केवल तभी प्रभावी होती है, जब इसे प्रदान किया जाता है। केवल रिक्ति की मौजूदगी से किसी कर्मचारी को पिछली तारीख से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के पास पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का मौलिक अधिकार है, लेकिन पदोन्नति प्राप्त करने का नहीं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने फैसले में कहा कि किसी कर्मचारी को पिछली तारीख से पदोन्नति तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि सेवा नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो।
अध्यीक्षक ग्रेड 2 के बाद अधीक्षक ग्रेड 1 पर पदोन्नति होनी थी। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशक ने 7 मार्च 2024 को सभी जिला उप निदेशकों से पात्र उम्मीदवारों की सूची मांगी थी। याचिकाकर्ता का नाम पात्र उम्मीदवारों की सूची में था, जिसे 8 अप्रैल 2024 को निदेशक को भेजा गया था। याचिकाकर्ता ने 11 जून 2024 को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया और 22 जून 2024 को याचिका दायर की। याचिका में डीपीसी की बैठक आयोजित करने और उन्हें पदोन्नति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
हालांकि 30 जून 2024 को अधीक्षक ग्रेड 2 के पद से ही सेवानिवृत हो गए। अदालत ने फैसले में कहा है कि प्रतिवादियों ने डीपीसी बैठक को स्थगित करने के कारण बताए हैं। पदोन्नति के लिए उम्मीदवारों के विवरण अप्रैल से जून 2024 के बीच प्राप्त हुए। 12 जुलाई 2024 को तैयार किए गए पैनल में कुछ कमियां थीं, जो सतर्कता विभाग के निर्देशों के तहत आवश्यक थी। इन कमियों को ठीक करने के बाद डीपीसी की बैठक 15 अक्टूबर 2024 को आयोजित की गई, जब तक याचिकाकर्ता पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे।