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अदालत: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृत्यु के समय की नीति ही मान्य; जानें पूरा मामला

Sun, 01 Mar 2026 10:12 AM IST
Ankesh Dogra भारती मेहता, शिमला।
भारती मेहता, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 01 Mar 2026 10:12 AM IST
सार

किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके आश्रितों को नौकरी देने के लिए वही नीति लागू होगी, जो उसकी मृत्यु के समय प्रभावी थी। ये कहना है हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का। 

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Himachal High Court said only the policy at the time of death is valid for compassionate appointment
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल हाईकोर्ट ने अनुकंपा पर नियुक्ति मामले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके आश्रितों को नौकरी देने के लिए वही नीति लागू होगी, जो उसकी मृत्यु के समय प्रभावी थी। खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही और नौकरशाही की उदासीनता को देरी के लिए बहाना नहीं बनाया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अपील दायर करने में 709 दिन की देरी को माफ करने से इन्कार कर राज्य सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।

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अदालत ने इसे घोर लापरवाही और निष्क्रियता करार देते हुए कहा कि सरकार एक ऐसी विधवा के मामले में देरी कर रही थी, जो पति की असामयिक मृत्यु के बाद हक की लड़ाई लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए सिर्फ मृत्यु की तिथि ही एकमात्र निश्चित कारक है। नीति में बदलाव का लाभ या नुकसान उस तारीख के आधार पर तय होना चाहिए न कि इस आधार पर कि आवेदन पर विचार कब किया जा रहा है। 
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इसी के साथ कोर्ट ने सरकार की अर्जी और मुख्य अपील दोनों को खारिज कर दिया। सरकार की ओर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि अधिकारियों की व्यक्तिगत गलती के कारण संस्थागत हितों को नुकसान नहीं होना चाहिए। जुर्माना भरकर देरी माफ की जानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि सरकार के पास फैसले की प्रति अक्तूबर 2023 में आ गई थी, लेकिन फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमने में ही महीनों लग गए। अक्तूबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच सरकार की ओर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले। दूसरी बार अनुरोध करने के एक साल बाद मई 2025 में अपील दायर करने की मंजूरी दी गई।

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एकलपीठ ने दिया था यह फैसला : प्रतिवादी अनुज कुमारी के पति शिक्षा विभाग में जेबीटी शिक्षक थे। 12 जनवरी 2017 को उनका निधन हो गया। अनुज ने अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया। सरकार ने 23 जुलाई 2021 को आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह 2019 की नई अनुकंपा नीति के अनुसार उच्च आय मानदंड के कारण पात्र नहीं हैं। एकल पीठ ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया था। साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता के मामले पर छह सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार किया जाए।
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