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Himachal: कर्मचारी चयन आयोग को हाईकोर्ट की नसीहत, कहा- साक्षात्कार से पहले करे योग्यता मूल्यांकन

Fri, 16 Dec 2022 08:13 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 16 Dec 2022 08:13 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग की कार्यशैली पर टिप्पणी की है। आयोग को नसीहत देते हुए अदालत ने साक्षात्कार से पहले योग्यता का मूल्यांकन करने के आदेश दिए हैं। अयोग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाकर आयोग ने याचिकाकर्ता को वंचित किया था। 

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himachal High Court's advice to the Staff Selection Commission, do merit assessment before the interview
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग की कार्यशैली पर टिप्पणी की है। आयोग को नसीहत देते हुए अदालत ने साक्षात्कार से पहले योग्यता का मूल्यांकन करने के आदेश दिए हैं। अयोग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाकर आयोग ने याचिकाकर्ता को वंचित किया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने आयोग को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता सहित अन्य योग्य उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाए और कनिष्ठ प्रोग्रामर के पद पर तैनाती की सिफारिश करे। अदालत ने इसके लिए 10 जनवरी 2023 तक समय दिया है। मामले के अनुसार 20 मई, 2016 को कर्मचारी चयन आयोग ने कनिष्ठ प्रोग्रामर के 4 पद भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन के तहत 245 उम्मीदवारों ने आवेदन किया। इनमें 70 उम्मीदवारों का आवेदन निर्धारित फीस जमा न करने पर रद्द कर दिया गया। 175 उम्मीदवारों के आवेदन अस्थायी तौर पर स्वीकार किए गए। लिखित परीक्षा में केवल 23 उम्मीदवारों ने भाग लिया। चार पद भरने के लिए 1:3 की रेशो से मेरिट वाले 12 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। साक्षात्कार में केवल 8 उम्मीदवारों ने ही भाग लिया। इनमें 7 लोगों को अयोग्य घोषित किया गया। सिर्फ एक योग्य उम्मीदवार का साक्षात्कार लिया गया और उसे कनिष्ठ प्रोग्रामर के पद पर तैनाती की सिफारिश की गई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि आयोग ने अयोग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाकर आयोग ने याचिकाकर्ता को वंचित किया, जबकि वह पूरी तरह से कनिष्ठ प्रोग्रामर के  पद के लिए योग्य था। 

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बिना वैध परमिट के हिमाचल में प्रवेश नहीं करेगी निजी वोल्वो 
 प्रदेश में बिना वैध परमिट के निजी वोल्वो बसें प्रवेश नहीं कर सकेंगी। हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग के फैसले को सही ठहराते हुए हरियाणा निवासी रविंद्र त्यागी की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। मामले के अनुसार 26 अक्तूबर, 2021 को परिवहन विभाग ने याचिकाकर्ता की वोल्वो बस को हिमाचल आने से रोक दिया था। हिमाचल में प्रवेश करने के लिए वैध परमिट न होने के कारण विभाग ने उसकी वोल्वो को जब्त कर दिया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसके पास ऑल इंडिया परमिट है। सभी कागज पूरे होने के बावजूद विभाग ने गलत तरीके से उसकी बस को जब्त किया है। परिवहन विभाग की ओर से दलील दी गई कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत दो तरह के परमिट जारी किए जाते हैं। एक के तहत पर्यटक ठेके के आधार पर बस बुक करते है और पूरे भारत वर्ष में घूम सकते हैं, जबकि दूसरे के तहत प्रत्येक पर्यटक को अलग-अलग किराया देना होता है। यदि बस को ठेके के आधार पर बुक किए जाने का परमिट दिया गया हो तो उस स्थिति में हरेक पर्यटक से अलग-अलग किराया नहीं लिया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपने निर्णय में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत जारी किए गए परमिट को उसी के हिसाब से अपनाना पडे़गा। अदालत ने पाया कि परिवहन विभाग ने याचिकाकर्ता की बस को सही जब्त किया है। अदालत ने विभाग की दलील से सहमती जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने नियमोें का उल्लंघन किया है। उसे ठेके के आधार पर बस चलाने का परमिट जारी किया गया है। जबकि वह हरेक पर्यटक से अलग-अलग किराया लेकर हिमाचल में अपनी बस नहीं चला सकता। 

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