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प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने शिक्षा बोर्ड को लगाई फटकार

Mon, 27 Jun 2016 10:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 27 Jun 2016 10:13 AM IST
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administrative tribunal rebuke hp school education board over travelling allowance

हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को लताड़ते हुए कहा कि बोर्ड जैसी सार्वजनिक संस्था से उसने लालफीताशाही, मनमाने और गैर जिम्मेदार रवैये की उम्मीद नहीं थी। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायाधीश वीके शर्मा और सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने धर्मशाला सर्किट बेंच के दौरान यात्रा भत्ते से जुड़े मामले का निपटारा करते हुए यह लताड़ लगाई।

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ट्रिब्यूनल ने बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश दिए कि जैसे प्रार्थी को यात्रा भत्ते जैसे मुद्दे पर भटकाने की कोशिश की गई, ऐसी कोशिश भविष्य में किसी और कर्मचारी से नहीं होनी चाहिए। मामले के अनुसार बोर्ड में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट कृष्ण चंद वर्ष
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1994 में जूनियर असिस्टेंट के पद पर तैनात थे। मार्च 1994 में होने वाली बोर्ड की परीक्षाओं से जुड़ी सामग्री को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला काजा पहुंचाने के लिए उन्हें और साथ एक चपरासी को जिम्मेदारी सौंपी गई।

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पैसे देना तो दूर की बात, उल्टा बैठा दी जांच

administrative tribunal rebuke hp school education board over travelling allowance

भारी बर्फबारी के बावजूद प्रार्थी ने चार मार्च 1994 को सामग्री सही ठिकाने पर पहुंचा दी। चार फरवरी 1995 को यात्रा भत्ते की मांग करते हुए 20,457 रुपए के बिल बोर्ड के कार्यालय में सौंपे। चार साल बीत जाने पर भी जब बिल की अदायगी नहीं की गई, तो उन्होंने बोर्ड के सचिव को प्रतिवेदन किया।

बार-बार मामला उठाने के बावजूद उन्हें भत्ते की अदायगी तो दूर उल्टे बोर्ड ने 28 अक्तूबर 2005 को यात्रा भत्ते के बिल में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच बैठा दी। प्रार्थी ने इन आदेशों को ट्रिब्यूनल में वर्ष 2005 में चुनौती दी और ट्रिब्यूनल ने जांच पर अंतरिम

रोक लगा दी। ट्रिब्यूनल ने मामले का निपटारा करते हुए यात्रा भत्ते के बिल में अनियमितताओं के आरोपों को गलत पाते हुए बोर्ड के 28 अक्तूबर 2005 को जारी जांच आदेशों को खारिज कर दिया और प्रार्थी को 31 जुलाई तक यात्रा भत्ता नौ फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश पारित किए।

 

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