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हिमाचल हाईकोर्ट का अहम फैसला: अनुबंध सेवाकाल को पेंशन ही नहीं, वार्षिक वेतन वृद्धि में भी गिनने के दिए आदेश
Fri, 24 Jan 2025 10:05 AM IST
Krishan Singh
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 24 Jan 2025 10:05 AM IST
सार
प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए याचिकाकर्ता की अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए गिनने के आदेश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए याचिकाकर्ता की अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए गिनने के आदेश दिए हैं। अदालत ने छह हफ्ते में याचिकाकर्ता को वेतन वृद्धि प्रदान करने के भी आदेश दिए। न्यायाधीश ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के उन सभी महत्वपूर्ण निर्णयों का जिक्र सेवाओं को स्थायी नियुक्ति और वार्षिक वेतन वृद्धि समेत पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सरकार ने उनकी अनुबंध आधार पर टीजीटी के रूप में सेवाओं को वार्षिक वृद्धि के लिए नहीं गिना है।
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सरकार ने सीसीएस पेंशन नियम 1972 के तहत पेंशन की गणना के लिए उनके अनुबंध कार्यकाल को स्वीकार कर लिया, लेकिन अनुबंध अवधि के दौरान अर्जित वार्षिक वेतन वृद्धि देने से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि शीला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि संविदा सेवाओं को नियमितीकरण कर स्थायी सेवाओं के लिए गिना जाए। साथ ही अलग-अलग मामलों में संविदा सेवाओं को पेंशन लाभ, वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए गिना जाएगा।
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