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HP High Court: प्रदेश सरकार को लौटानी होगी हाइड्रो कंपनी की 64 करोड़ रुपये की राशि
Sun, 15 Jan 2023 12:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर
पुष्पेंद्र वर्मा, शिमला
पुष्पेंद्र वर्मा, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 15 Jan 2023 12:13 PM IST
सार
राज्य सरकार ने 23 सितंबर 2017 को कंपनी के साथ हुए करार को रद्द कर दिया और अपफ्रंट प्रीमियम के 64 करोड़ रुपये जब्त कर दिए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सरकार को सेली हाइड्रो कंपनी के 64 करोड़ रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। अपफ्रंट प्रीमियम के 64 करोड़ रुपये पर 7 फीसदी ब्याज भी अदा करना होगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने सेली हाइड्रो कंपनी की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। लाहौल-स्पीति में चिनाब नदी पर बनने वाली 320 मेगावाट जल विद्युत परियोजना के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता कंपनी को 28 फरवरी 2009 को आवंटन पत्र जारी किया था।
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इसमें निहित शर्तों में कंपनी को अपफ्रंट प्रीमियम के 64 करोड़ रुपये जमा करवाने थे। कंपनी ने 20 जुलाई 2009 को राज्य सरकार के पास जमा करवा दिए थे। अनुबंध के अनुसार कंपनी को इस परियोजना की रिपोर्ट तीन साल में पूरी करनी थी। परियोजना रिपोर्ट बनाते समय पाया गया कि यह परियोजना कंपनी के लिए तकनीकी और आर्थिक लाभप्रद नहीं है। कंपनी ने आवंटन पत्र में निहित शर्तों में इस परियोजना का निर्माण छोड़ दिया। राज्य सरकार ने 23 सितंबर 2017 को कंपनी के साथ हुए करार को रद्द कर दिया और अपफ्रंट प्रीमियम के 64 करोड़ रुपये जब्त कर दिए।
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अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि सरकार ने गलत तरीके से कंपनी के 64 करोड़ रुपये जब्त करने का निर्णय लिया है। हालांकि तकनीकी और आर्थिक लाभप्रद न होने पर कंपनी आवंटन पत्र में निहित शर्तों के तहत इस परियोजना का निर्णाण छोड़ सकती थी। अदालत ने पाया कि सरकार यह जानती थी कि यह परियोजना तकनीकी और आर्थिक लाभप्रद नहीं है। इसी कारण सरकार ने वर्ष 2018 में इस परियोजना का निर्माण कार्य रियायती शर्तों पर एनटीपीसी को दिया था। हालांकि तकनीकी और आर्थिक लाभप्रद न होने से एनटीपीसी ने भी वर्ष 2019 में इस परियोजना का निर्माण करना छोड़ दिया।
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अदाणी ग्रुप के भी देने हैं 280.06 करोड़
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अदाणी ग्रुप के 280.06 करोड़ रुपये लौटाने के भी आदेश दिए हैं। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना में अदाणी ग्रुप ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ की राशि जमा करवाई थी। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया था। सरकार ने 5 दिसंबर, 2017 को अदाणी ग्रुप का अपफ्रंट प्रीमियम जब्त कर दिया था। हालांकि एकल पीठ कि निर्णय के बाद अब सरकार ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की है।