Himachal: धार्मिक स्वतंत्रता कानून मामले में तीन हफ्ते में जवाब दायर करे सरकार, हाईकोर्ट ने दिए आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि जवाब दायर न करने की स्थिति में राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर न करने पर इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
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हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले में जवाब दायर करने के लिए तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि जवाब दायर न करने की स्थिति में राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर न करने पर इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। मामले को मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून अधिनियम 2019 के प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि इस अधिनियम के प्रावधान भारतीय संविधान के विरोधाभासी हैं। ये प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। तर्क दिया गया है कि अभी तक प्रदेश में इस अधिनियम में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है। ऐसी सूरत में कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाना कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन प्रदेश में धर्मांतरण संशोधन विधेयक को सदन में पारित कर दिया गया। इसमें अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। इसके अलावा अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण की सुविधाएं लेते हैं तो ऐसे में उन्हें तीन से पांच साल तक सजा और 50 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। संशोधित कानून के मसौदे के मुताबिक किसी व्यक्ति की ओर से अन्य धर्म में विवाह करने और ऐसे विवाह के समय अपने मूल धर्म को छिपाने की स्थिति में भी तीन से 10 साल तक के कारावास का प्रावधान होगा। कानून में दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।