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हिमाचल प्रदेश : लिव-इन में रह रहे बालिग जोड़े को हाईकोर्ट की राहत, अपनी इच्छा से साथ रहने की मिली अनुमति

Thu, 27 Aug 2026 09:32 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 27 Aug 2026 09:32 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे करीब 21 वर्षीय युवक-युवती को राहत दी है। अदालत ने कहा कि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रहना चाहते हैं, इसलिए उन्हें अपने निजी जीवन के संबंध में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है। युवक के माता-पिता ने अब रिश्ते पर आपत्ति नहीं जताई, हालांकि उन्होंने पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता जाहिर की। पढ़ें पूरी खबर...

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himachal high court live in couple right to live together
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक बालिग युवक-युवती को बड़ी राहत देते हुए उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार साथ रहने और रिश्ते को आगे जारी रखने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि जब दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी मर्जी से कोई निर्णय ले रहे हैं, तो उन्हें अपने निजी जीवन के संबंध में स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार है।

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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने युवती की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत के समक्ष बताया गया कि दोनों की उम्र करीब 21 वर्ष है और वे जनवरी 2026 से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।
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युवक के माता-पिता को रिश्ते पर था एतराज
मामले में युवक के माता-पिता शुरुआत में दोनों के रिश्ते के विरोध में थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि माता-पिता युवक को उसकी इच्छा के विरुद्ध कांगड़ा स्थित घर ले गए और वहां रखा गया। सुनवाई के दौरान युवक के माता-पिता भी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि अब उन्हें युवक-युवती के रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, माता-पिता ने अदालत के सामने यह चिंता जरूर जताई कि युवक अभी पढ़ाई कर रहा है और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के फैसले का उसकी शिक्षा पर असर पड़ सकता है।

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हाईकोर्ट ने दोनों युवाओं की काउंसलिंग की
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने दोनों युवाओं से बातचीत और काउंसलिंग भी की। अदालत ने उन्हें अपने रिश्ते के साथ-साथ शिक्षा और भविष्य को लेकर भी गंभीर रहने की सलाह दी। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए स्पष्ट किया कि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रहना चाहते हैं। ऐसे में केवल माता-पिता की असहमति के आधार पर उन्हें अलग रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

दोनों अलग-अलग कंपनियों में कर रहे काम
अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि युवक और युवती दोनों अलग-अलग कंपनियों में काम करते हैं। दोनों ने अपनी इच्छा से साथ रहने और अपने संबंध को जारी रखने की बात कही। हाईकोर्ट ने दोनों की उम्र, उनकी स्वतंत्र इच्छा और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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