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वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Tue, 23 May 2017 12:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 23 May 2017 12:32 PM IST
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Himachal High Court Judgement over encroachment by apple growers on forest land
हिमाचल हाईकोर्ट

प्रदेश हाईकोर्ट में वन भूमि पर अवैध ढंग से सेब के बगीचे विकसित करने के मामले पर सुनवाई 19 जून को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने अवैध कब्जाधारियों को 2 सप्ताह के भीतर 5 बीघा से अधिक की कब्जाई गई भूमि को खुद छोड़ने के आदेश दिए।

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उल्लेखनीय है कि कृष्ण चंद सारटा ने वर्ष 2014 में मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लिख कर बताया था कि लोगों ने जंगलों को काटकर घर, खेत और बगीचे बना लिए हैं और वन विभाग की मिलीभगत से इन्हें बिजली पानी के कनेक्शन भी मुहैया करवा दिए गए हैं। कोर्ट ने पत्र पर संज्ञान लिया और वन विभाग को समय समय पर जारी आदेशनुसार अवैध बगीचों को काट कर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने के आदेश दिए।
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वन विभाग ने कोर्ट के आदेशानुसार वन भूमि से सेब के पेड़ों को काटने का अभियान छेड़ा, परंतु कुछ कब्जाधारियों ने विभिन्न अदालतों में मामले दायर कर इस मुहिम को लंबा लटकाने की कोशिश की। इसके पश्चात हाईकोर्ट ने ऐसे मामले देख रहे न्यायालयों को तय समय सीमा के भीतर वन भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों को निपटाने के आदेश दिए।
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कई बार कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए कि वह तय सीमा के भीतर वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाए। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान सरकार को नियमितीकरण पॉलिसी लाने की इजाजत तो दे दी थी, परंतु यह भी कह दिया था कि पॉलिसी की वैधता कोर्ट द्वारा कभी भी परखी जा सकती है।

हाईकोर्ट ने तलब किए हाइवे प्रोजेक्ट डायरेक्टर और डीसी सोलन

Himachal High Court Judgement over encroachment by apple growers on forest land

प्रदेश हाईकोर्ट ने परवाणू से शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाड़ियों की अव्यवस्थित पार्किंग और अवैध कब्जों की शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इस सड़क मार्ग से जुड़े हाइवे प्रोजेक्ट के डायरेक्टर तथा डीसी सोलन को तलब करने के आदेश जारी किए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने राजमार्ग पर स्थित ढाबों और दुकानों के आसपास गाड़ियों की अव्यवस्थित पार्किंग पर कोई कार्रवाई न करने पर एनएचएआई को फटकार भी लगाई।

मामले की सुनवाई की दौरान कोर्ट को बताया गया कि सड़क के किनारे बने अधिकांश ढाबों के पास अपनी पार्किंग न होने के कारण वे गाड़ियां सड़क पर ही पार्क करवाते हैं, जिससे उक्त क्षेत्रों में हमेशा जाम लगा रहता है। एनएचएआई व पुलिस की ओर से उक्त मार्ग पर कभी भी कोई पेट्रोलिंग नहीं की जाती है।

इस कारण इस सड़क मार्ग पर कई गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। कोर्ट ने इस शिकायतों के मद्देनजर उक्त अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया है। मामले पर सुनवाई 29 मई को होगी।

अवैध भवनों को नियमित कराने की सुनवाई टली

Himachal High Court Judgement over encroachment by apple growers on forest land

प्रदेश हाईकोर्ट में अवैध भवनों को नियमित करने के लिये बनाए गए संशोधित कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई 12 जून के लिये टल गई। कोर्ट ने अधिवक्ता अभिमन्यु राठौर की ओर से दायर याचिका में अवैध भवनों को नियमित करवाने के लिए नये कानून के तहत किये गए आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा रखी है।

मामले के अनुसार इस वर्ष 24 जनवरी को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर टीसीपी संशोधन अधिनियम 2016 राजपत्र में प्रकाशित किया। इस कानून को 15 जून 2016 से लागू माना गया। इस कानून को 24 जनवरी 2018 तक प्रभावी भी बनाया गया। इस अधिसूचना के तहत नियमितीकरण के लिये संबंधित लोगों को 60 दिनों का समय देते हुए आवेदन आमंत्रित किये गए।

यह समय अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशित होने से शुरू हुआ। आवेदन के साथ 1000 की फ ीस भी मांगी गयी थी। प्रार्थी अभिमन्यु राठौर द्वारा दायर याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि इस तरह के कानूनों से अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जाता है जिससे ईमानदार लोग खुद को असहज अनुभव करते हैं।

सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में नाकाम हो गयी है और कानून तोड़ने वालों के संरक्षण में काम कर रही है। इस तरह के कानूनों से कानून का राज स्थापित नहीं होता। यह केवल दिमाग का इस्तेमाल न किये जाने की निशानी है जो इस तरह के कानून बनाये जा रहे हैं।

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