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विशेष परिस्थितियों में कोर्ट में अब जमानत के लिए नहीं खड़ा करना होगा जानने वाला

Sat, 01 Aug 2020 10:20 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 01 Aug 2020 10:20 PM IST
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himachal high court judgement for bail procedure
सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल हाईकोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए व्यवस्था दी है कि विशेष परिस्थितियों में कोर्ट में अब जमानत के लिए किसी जानने वाले व्यक्ति को लाने की जरूरत नहीं होगी। हाईकोर्ट ने पश्चिमी बंगाल के याचिकाकर्ता की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि भारत के संविधान का अनुच्छेद-21 जीवन के अधिकार के अलावा गरिमा के साथ जीने की गारंटी देता है।

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किसी से जमानती के तौर पर खड़ा होने को भीख मांगना या गुहार लगाना निश्चित तौर पर आरोपियों के गर्व को ठेस पहुंचाता है।  आरोपी ने कोर्ट से अपील की थी उसे जमानत देते समय श्योरिटी बांड के बदले नकद राशि जमा करवाने की अनुमति दी जा जाए। वह किसी को नहीं जानता जो यकीनन उसके श्योरिटी के तौर पर खड़ा हो। वर्तमान में पश्चिम बंगाल से ऐसा कोई नहीं है, जो निश्चित बांड प्रस्तुत करने के लिए उसके लिए यात्रा कर सकता है।
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जमानत देते समय जमानत को नकद राशि जमा करवाने के अनुरोध की अनुमति देते हुए न्यायमूर्ति अनूप चिटकारा ने कहा कि हमें पहले ही देर हो चुकी है कि हम श्योरिटी बांड के स्थान पर नकद राशि को प्रोत्साहित करें। नकदी से आरोपी की उपस्थिति की संभावना में सुधार होता है, क्योंकि वह जानता है कि उसका पैसा सुरक्षित है और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज अर्जित कर रहा है। यह उसे एक बार भी चूक न करने के लिए भी प्रेरित करेगा।
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याचिकाकर्ता को जालसाजी और धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ  भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 120 बी के तहत इसी साल 10 जनवरी को कुल्लू के निरमंड पुलिस थाना में  आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता के खिलाफ  आरोप है कि उसने निरमंड निवासी का ओटीपी लेकर उसके बैंक खातों से 9 लाख 87 हजार निकाल लिए।


जस्टिस चिटकारा ने कहा कि ऑनलाइन के आगमन को देखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण यह है कि जमानत देते समय अदालत को अभियुक्त को एक विकल्प देना चाहिए कि वह एक निश्चित श्योरिटी बांड या एक निश्चित राशि जमा करवाए। कोर्ट ने कहा कि दंड संहिता प्रक्रिया की धारा 445 को अभियुक्त के अस्तित्व के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।

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