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हाईकोर्ट: गुणवत्ताहीन याचिका पर शिक्षकों पर लगी 1.20 लाख रुपये की कॉस्ट
Wed, 24 Nov 2021 08:22 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 24 Nov 2021 08:22 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई थी और उन्हें नियमों के तहत लगे निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर प्रार्थियों की याचिका को 1.20 लाख रुपये की कॉस्ट सहित खारिज कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने अजय कुमार पांटा और अन्य दो प्रार्थियों की ओर से दायर याचिका को गुणवत्ताहीन पाते हुए यह आदेश पारित किए।
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याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थियों एवं निजी प्रतिवादियों को शिक्षा विभाग ने वर्ष 1997 में शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के पद पर नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं ने शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2018 में जारी वरिष्ठता सूची को हाईकोर्ट में यह कहकर चुनौती दी थी कि विभाग ने सूची में निजी प्रतिवादियों को उनसे ऊपर दर्शाया है, जबकि वे उनसे कनिष्ठ हैं।
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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई थी और उन्हें नियमों के तहत लगे निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने याचिका में दिए तथ्यों से पाया कि प्रार्थियों ने बेवजह प्रतिवादियों को तंग करने के उद्देश्य से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।
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कोर्ट ने प्रार्थियों को कास्ट राशि 90 दिनों के भीतर 12 निजी प्रतिभागियों को 10 हजार के हिसाब से भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं। मामले को आदेशों की अनुपालना के लिए 23 फरवरी 2022 को रखा गया है।