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हिमाचल हाईकोर्ट: गुड़िया मामले की जांच दोबारा करवाए जाने की याचिका पर आठ दिसंबर को सुनवाई

Mon, 06 Dec 2021 09:39 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 06 Dec 2021 09:39 PM IST
सार

हाईकोर्ट में गुड़िया मामले की जांच दोबारा करवाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर आठ दिसंबर को सुनवाई होगी। गुड़िया के परिजन सीबीआई जांच पर लगातार संदेह जता रहे हैं। वे इस मामले की दोबारा से छानबीन करवाने की भी मांग उठा रहे हैं। 

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Himachal High Court: Hearing on December 8 on the petition for re investigation of Gudiya case
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया मामले की जांच दोबारा करवाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर आठ दिसंबर को सुनवाई होगी। प्रार्थी की ओर से दायर याचिका में सीबीआई की जांच पर खामियों को उजागर करते हुए इस मामले की दोबारा करवाने की मांग की गई है। प्रार्थी का आरोप है कि सीबीआई ने इस प्रकरण में सभी तथ्यों की तह में जाकर जांच नहीं की है। प्रार्थी ने इस मामले में सामने आई फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि इस रिपोर्ट के अनुसार अपराध में एक से अधिक अपराधियों की संलिप्तता की संभावना जताई गई थी, जबकि सीबीआई ने केवल एक दोषी पर जांच केंद्रित कर उसे सजा दिलाई है।

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प्रार्थी ने सभी दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर फिर से इस मामले की जांच करवाने की मांग की है। बहुचर्चित गुड़िया मामला शिमला जिला की तहसील कोटखाई में हलाइला क्षेत्र के पास घटित हुआ था। नाबालिग गुड़िया दसवीं कक्षा की छात्रा थी और दुराचार के बाद हलाइला के जंग में मृत अवस्था में निर्वस्त्र मिली थी। इसमें सीबीआई ने एक चिरानी को आरोपी बनाया है, जिसे सजा भी हो चुकी है। गुड़िया के परिजन सीबीआई जांच पर लगातार संदेह जता रहे हैं। वे इस मामले की दोबारा से छानबीन करवाने की भी मांग उठा रहे हैं। 

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हाईकोर्ट से राहत, एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को दिया साक्षात्कार में भाग लेने की अनुमति

 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे प्रशिक्षु डॉक्टरों को मंगलवार को होने वाले वॉक इन इंटरव्यू में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। यह इंटरव्यू सरकारी डाक्टरों के पदों के लिए आयोजित करवाए जा रहे हैं। प्रार्थियों के अनुसार वे एमबीबीएस अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे है। उनके प्रशिक्षण की अवधि के 3-4 महीने बचे हैं। ऐसे में चार महीने बाद ये डाक्टर सरकारी डाक्टरों के लिए होने वाले इंटरव्यू के लिए पात्र होंगे। उनका आरोप है कि सरकार व विभाग की लेटलतीफी के कारण उनके चार महीने बर्बाद हो रहे हैं।

मामले पर सुनवाई न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येंन वैद्य की खंडपीठ के समक्ष हुई। आमतौर पर उनका बैच दिसंबर में समाप्त हो जाता है जबकि कोविड काल में परीक्षाएं समय पर न होने के कारण अभी इनका बैच पूर्ण होने में करीब चार महीने बाकी है। प्रशिक्षु डाक्टरों ने आरोप लगाया है कि विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों की एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी हो गई है। ऐसे में सरकार व विभाग विदेशों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को फायदा पहुंचाने के लिए अभी सरकारी डाक्टरों के पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू करवा रही है।

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