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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court, Government cannot repeal legal rules by administrative instructions

Himachal High Court: सरकार प्रशासनिक निर्देशों से निरस्त नहीं कर सकती वैधानिक नियम

Tue, 30 Aug 2022 09:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Aug 2022 09:02 PM IST
सार

अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि सरकार प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर वैधानिक नियमों में संशोधन नहीं कर सकती है। लेकिन यदि किसी खास मुद्दे पर नियम स्पष्ट नहीं है तो उस स्थिति में सरकार इस कमी को अनुपूरक नियम बना कर पूरा कर सकती है। 

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Himachal High Court, Government cannot repeal legal rules by administrative instructions
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अधिकारियों की वरीयता के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने निर्णय सुनाया है कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए नियम वैधानिक हैं। इन नियमों को प्रशासनिक निर्देश के तहत निरस्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि सेवा में वरिष्ठता पाने का अधिकार मौलिक नहीं, वैधानिक है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि सरकार प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर वैधानिक नियमों में संशोधन नहीं कर सकती है। लेकिन यदि किसी खास मुद्दे पर नियम स्पष्ट नहीं है तो उस स्थिति में सरकार इस कमी को अनुपूरक नियम बना कर पूरा कर सकती है।  ऊना जिला के कुलदीप कुमार और अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने 10 जुलाई 1997 को जारी उन प्रशासनिक निर्देशों को निरस्त कर दिया जिसके तहत प्रतिवादियों को वरीयता का लाभ देते हुए कानूनगो के पद पर पदोन्नत किया गया था।

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अदालत ने प्रतिवादियों को कानूनगो के पद पर दी गई पदोन्नति को भी रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग को दोबारा वरीयता सूची बनाने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता और अन्य वर्ष 1998 में राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर नियुक्त हुए थे। भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1992 के तहत उनकी वरीयता तय की गई। इस वरीयता के आधार पर उनकी पदोन्नति भी दी गई। राज्य सरकार ने वर्ष 1997 में प्रशासनिक निर्देश के तहत भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1992 में संशोधन किया। विभाग ने पटवारी के पद की वरीयता इन प्रशासनिक निर्देश के आधार पर की गई। याचिकाकर्ताओं से कनिष्ठ को वरिष्ठ बनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने इस विसंगति को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। अदालत ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए यह निर्णय सुनाया।       

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