Himachal High Court: लोक सेवकों का भ्रष्टाचार कैंसरयुक्त लसिका ग्रंथियों की तरह विशाल समस्या
रिश्वत मांगने वाले इंश्योरेंस सर्वेक्षक को सशर्त जमानत देते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने इंश्योरेंस सर्वेक्षक को दो लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक सेवकों के भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा ने अपने निर्णय में कहा कि लोक सेवकों का भ्रष्टाचार कैंसरयुक्त लसिका ग्रंथियों की तरह विशाल समस्या है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि, आरोपों और साक्ष्यों की प्रकृति, गंभीरता और दोषसिद्धि को देखते हुए जमानत दी जा सकती है। विचाराधीन कैदियों को अनिश्चित काल के लिए हिरासत में रखना असांविधानिक है। रिश्वत मांगने वाले इंश्योरेंस सर्वेक्षक को सशर्त जमानत देते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने इंश्योरेंस सर्वेक्षक को दो लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पाया कि सीबीआई ने इस मामले में जांच लगभग पूरी कर ली है। आरोपी के खिलाफ विचारण अदालत में आरोपपत्र दाखिल करना अभी बाकी है। सीबीआई के अभियोग का निपटारा करने में विचारण अदालत को ज्यादा समय लग सकता है।
अभियोग का निपटारा होने तक आरोपी को हिरासत में रखना उचित नहीं है। परवाणू के एक व्यापारी की शिकायत पर सीबीआई ने एन एस सिद्धू और जेके मित्तल के खिलाफ शिमला में प्राथमिकी दर्ज की है। केतन कुमार ने सीबीआई को शिकायत दी कि इंश्योरेंस सर्वेक्षक एन एस सिद्धू उसके 44 लाख के बीमा की राशि को अदा करने के लिए 12 लाख की रिश्वत मांग रहा है। सीबीआई को बताया गया कि शिकायतकर्ता केतन कुमार की परवाणू में सेवी गो के नाम से वाहन की फैक्ट्री थी। वर्ष 2010 में अचानक से फैक्ट्री में आग लग गई और करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया। शिकायतकर्ता ने फैक्ट्री का बीमा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी चंडीगढ़ से करवाया था। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग दिल्ली शिकायतकर्ता को 44 लाख रुपये की राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए थे। इंश्योरेंस सर्वेक्षक सिद्धू ने बीमा की राशि अदा करने के लिए 12 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।