Himachal: हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कम्यूटेशन में ब्याज को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिए हैं कि कम्यूटेशन में साधारण ब्याज लिया जाता है या चक्रवृद्धि ब्याज, इस पर स्थिति स्पष्ट करे।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिए हैं कि कम्यूटेशन में साधारण ब्याज लिया जाता है या चक्रवृद्धि ब्याज, इस पर स्थिति स्पष्ट करे। अदालत में महाधिवक्ता ने बताया कि बैठक में निर्धारित किया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जो कम्यूटेशन में ब्याज लिया जाता है, वह साधारण ब्याज है या चक्रवृद्धि ब्याज, इसकी जानकारी केवल केंद्र सरकार दे सकती है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।
इस मामले की सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। पिछले आदेश में महाधिवक्ता को इस मामले को सुलझाने के लिए संयुक्त बैठक करने को कहा था। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से प्रतिनिधियों के साथ 17 मार्च को बैठक की गई। बैठक में तय किया कि कम्यूटेशन में जो ब्याज निर्धारित की जाती है वो केंद्र सरकार करती है। महाधिवक्ता ने अदालत से अपील की कि इसको देखते हुए केंद्र सरकार को पार्टी बनाया जाए।
कम्यूटेशन की 15 साल तक रिकवरी को बताया गलत
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि प्रदेश सरकार कम्यूटेशन की सहित 15 साल तक लेती है, जो गलत है। सरकार की रिकवरी का यह पैसा साढ़े दस महीनों में ही पूरा हो जाता है जबकि पेंशनरों से यह पैसा 15 साल तक लिया जाता है। केरल में 12 साल और गुजरात में 13 साल तक पैसा लिया जाता है।
हाईकोर्ट में देशराज की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पावर काॅरपोरेशन के निलंबित निदेशक देशराज की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दस्तावेज से जुड़ा सारा रिकाॅर्ड खंगाला गया। सरकार की ओर से अदालत से अपील की गई कि अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाए। वहीं याचिकाकर्ता देशराज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। याचिकाकर्ता 4 तारीख के बाद विमल नेगी से कभी नहीं मिला, बल्कि जब उन्हें पता चला तो विमल की तलाश के लिए अपने अधिकारियों को भेजा।
दलीलों में कहा गया कि अगर वह बड़े अधिकारियों से परेशान थे तो उन्हें पुलिस में शिकायत करनी चाहिए थी। दूसरी ओर, परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि आत्महत्या के लिए केवल शारीरिक मौजूदगी ही काफी नहीं होती। अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया, जो कार्यालय की डायरी एंट्री से पता चलता है। विमल नेगी को रात के दो-दो बजे तक कार्यालय में बिठाया जाता था। विमल नेगी की मौत मामले में परिजनों ने देशराज और हरिकेश मीणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का मानना है कि इन दोनों अधिकारियों की ओर से विमल नेगी को गलत काम करने के लिए उकसाया जा रहा था और उन पर दबाव बनाया जा रहा था। उनकी मौत नदी में कूदने से नहीं, बल्कि उनकी मौत सोची समझी रणनीति के तहत हुई है।