अवैध निर्माण पर रोक लगाने को जयराम सरकार ने ढूंढा नया तरीका
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हिमाचल में अवैध निर्माण पर रोक लगाने को जयराम सरकार ने नया तरीका ढूंढा है। सरकार अवैध निर्माण को सील करने के लिए भवन मालिकों से शपथपत्र लेगी। शपथपत्र लेने के एक साल के भीतर सरकार अवैध निर्माण को भवन मालिकों से ही तुड़वाएगी। सरकार के पास अवैध निर्माण का सही आंकड़ा नहीं है।
सरकार ने हिमाचल में करीब 11 हजार अवैध निर्माण होने की बात कही है, जबकि यह आंकड़ा 30 हजार के आसपास हो सकता है। शपथपत्र मिलने से विभाग को इसकी जानकारी भी मिल जाएगी। अवैध निर्माण का एरिया सील करने के बाद लोगों को मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी।
सरकार ने फैसला लिया है कि भवन में जो एरिया अवैध होगा, उसे सील किया जाएगा। अगर अतिरिक्त मंजिल बना रखी है तो उस मंजिल में लगे दरवाजे और खिड़कियां हटाकर ईंट की चिनाई करनी होगी। अतिरिक्त मंजिल को जाने वाले रास्ते और सीढ़ियां भी तोड़नी होंगी। इसके बाद ही लोगों को बिजली और पानी के कनेक्शन मिलेंगे।
अवैध निर्माण में व्यावसायिक कॉमर्शियल कनेक्शन
हिमाचल में जिन लोगों ने बिना नक्शे के भवनों का निर्माण किया है या फिर नक्शा पास कर भवन निर्माण के बाद अतिक्रमण किया है, उन्हें सरकार की ओर से व्यावसायिक बिजली और पानी के कनेक्शन दिए गए हैं। कई भवन ऐसे हैं, जिन्हें एक ही बिजली मीटर मिला है। उन्होंने कमरों में आगे बिजली के सब मीटर लगाए हैं।
हिमाचल सरकार ने अवैध निर्माण को सील करने की अधिसूचना जारी कर दी है। भवन में जो एरिया अवैध होगा, उसे सील किया जाएगा। अन्य में भवन मालिकों को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी। - तरुण कपूर, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शहरी विकास विभाग
ये अधिकारी करेंगे कब्जा हटाने की निगरानी
वन भूमि पर अवैध कब्जे हटाने को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभाग ने अब इस काम की निगरानी मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) स्तर के अधिकारी से कराने का निर्णय लिया है। सीसीएफ रैंक के अधिकारियों को अपने क्षेत्र में वन भूमि से हटाए जा रहे कब्जों का निरीक्षण करना होगा।
विभाग ने यह सख्ती इसलिए की है, ताकि स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की मिलीभगत को रोका जा सके। दरअसल, हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी कि अवैध कब्जे हटाने के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इसी के बाद विभाग ने कब्जे हटाने के काम में बड़े अधिकारियों को भी जुटने के निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वन तरुण कपूर ने कहा कि प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद से लगातार अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई चल रही है। कहा कि अभी करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि से अवैध कब्जे हटाने का काम बचा है। इस काम को तेजी से पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों को कहा गया है।
अवैध अतिक्रमण बचाने को टूट रहे परिवार
वन भूमि पर पांच बीघा से कम के अवैध अतिक्रमण को नियमित करने का सरकार का फैसला अब परिवारों के टूटने की वजह बनता जा रहा है। वन विभाग के पास कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें परिवार के ही सदस्य एक दूसरे से अलग रहने की बात कहकर पांच बीघा जमीन देने की मांग कर रहे हैं। कई परिवार तो इसके लिए सरकारी दस्तावेज तक पेश कर रहे हैं। विभाग को अब समझ नहीं आ रहा कि लोगों के इस दांव से कैसे निपटा जाए।
दरअसल, प्रदेश हाईकोर्ट ने वन भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण व कब्जों को मुक्त करने के निर्देश दे रखे हैं। पांच बीघा से कम भूमि होने पर कार्रवाई नहीं की जा रही, लेकिन उससे ज्यादा कब्जा होने पर पांच बीघा से ऊपर की जमीन को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें सेब बगीचे होने पर पेड़ों को भी काटा जा रहा है।
प्रदेश वन विभाग ने इसको लेकर कार्रवाई शुरू की, लेकिन करीब काफी संख्या में ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें पिता पुत्र, भाई भाई जैसे रिश्तेदार अलग अलग रहने की बात कहते हुए कम से कम पांच बीघा जमीन देने की मांग कर रहे हैं। इससे परिवार के अलग अलग हिस्सेदारों को भी पांच पांच बीघा जमीन मिल सकती है।
विभाग के अधिकारियों ने अब इसके लिए पंचायत के परिवार रजिस्टर को आधार बनाना शुरू किया है। अगर उसमें परिवार के सदस्य एक ही हैं तो उनकी कुल भूमि में से पांच बीघा छोड़ बाकी पर कार्यवाही की जा रही है।