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हिमाचल में विधायक विकास निधि आवंटन के नियमों में बदलाव पर होगा विचार

Fri, 08 Feb 2019 11:39 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 08 Feb 2019 11:39 AM IST
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Himachal govt will consider changes in mla development fund allocation rules

प्रदेश सरकार विधायक क्षेत्र विकास निधि के इस्तेमाल व आवंटन को लेकर नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरवार को ऊना से विधायक सतपाल रायजादा के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

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प्रश्नकाल के दौरान रायजादा के अलावा विनोद कुमार और ठाकुर रामलाल ने कहा कि विधायक निधि का इस्तेमाल करने में कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं। इनमें युवक मंडल या सामुदायिक केंद्र निर्माण के लिए तो बजट दिया जा सकता है लेकिन उसके अंदर सीसीटीवी या जिम जैसी चीजों के लिए बजट नहीं दे सकते।
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जमीन की कमी के बीच मंदिरों की जमीन पर ऐसे भवनों को बनाने के लिए अब राशि नहीं दी जा सकती क्योंकि सरकारी तंत्र आपत्ति करता है कि धार्मिक संस्था की जमीन सरकार को हस्तांतरित की जा सकती है जबकि पहले इन जमीनों के लिए राशि दी जाती रही है।
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ऐसे में सरकार इस संबंध में बदलाव करे ताकि राशि का सही इस्तेमाल समाज के हित में हो सके। विधायकों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार इन सुझावों पर विचार कर बदलाव की कोशिश की जाएगी।

हां, स्कूली बच्चों को स्मार्ट वर्दी देने में हुई देरी 

Himachal govt will consider changes in mla development fund allocation rules

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्मार्ट वर्दी देने में हुई देरी को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है। वीरवार को सदन में शिक्षा मंत्री ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया ठीक नहीं होने कारण सरकार ने टेंडर रद्द किए।

इस कारण देरी हुई है। इसको मैं स्वीकार करता हूं। लैपटॉप खरीद में देरी का ठीकरा मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन पर फोड़ा। कहा, कारपोरेशन की देरी के चलते ही अभी तक बायोमीट्रिक मशीनों की भी खरीद नहीं हो पा रही है।

सरकार ने स्कूली बच्चों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों  को भी लैपटॉप देने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में तीन साल तक विद्यार्थियों को वर्दी नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में प्रारंभिक स्कूलों में नियमित आधार पर अध्यापकों की भर्ती नहीं की गई थी। दस सालों से प्लेसमेंट के आधार पर स्कूलों में प्रिंसिपलों को लगाया गया। उनकी सरकार बनने के बाद प्रदेश में 31 दिसंबर 2018 तक छह हजार 146 शिक्षकों की भर्ती की गई है।

स्कूलों में पांच हजार 502 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया हमीरपुर चयन बोर्ड पूरी कर रहा है। पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिना बजट प्रावधान के 21 कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया। हमारी सरकार ने इनमें से 16 कॉलेज खोल दिए हैं।

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