20 हजार शिक्षकों के लिए सरकार ने किया बड़ा एलान, RUSA पर भी राहत
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हिमाचल प्रदेश के करीब बीस हजार पैट, पैरा, पीटीए और एसएमसी शिक्षकों के लिए सरकार ने बड़ा एलान किया है। वीरवार को विपक्ष द्वारा शिक्षा पर लाए गए कटौती प्रस्ताव के जवाब में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विभिन्न श्रेणी शिक्षकों के बीच वेतन व अन्य सुविधाओं को लेकर चल रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए सरकार ठोस नीति बनाने जा रही है।
कहा कि सरकार या तो उन्हें रेगुलर करेगी या फिर उनके लिए एक नीति तैयार करेगी जिससे एक ही क्लास और एक ही विषय को पढ़ाने वाले अलग अलग श्रेणी के शिक्षकों को वेतन में अंतर का सामना न करना पड़े। चर्चा के जवाब में शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बावजूद पिछली सरकार ने इसे सख्ती से लागू नहीं किया।
यह नियम सरकारी के साथ निजी स्कूलों पर भी लागू होना था। लेकिन पिछली सरकार ने नियमों को दरकिनार कर सिर्फ स्कूल खोल दिए। कहा कि प्रदेश सरकार स्कूल बंद नहीं कर रही, उनका आकलन कर रही है। कहा कि अगर निजी स्कूल आरटीई के नियमों का पालन नहीं करेंगे तो सरकार उन्हें बंद करा देगी।
ट्रांसफर एक्ट पर क्या बोले सुरेश भारद्वाज
भारद्वाज ने कहा कि सरकार बनते समय जब उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जा रहा था तो उन्होंने मुख्यमंत्री से यही इच्छा जताई थी कि वह शिक्षा मंत्री बनना चाहते है, तबादला मंत्री नहीं। सरकार गठन के दो दिन बाद ही दिल्ली में हुई एक बैठक में उनकी मुलाकात कई प्रदेशों के मंत्रियों से हुई थी।
उसी के बाद से विभिन्न प्रदेशों के ट्रांसफर मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। कहा कि जब जमीन पर अभी कोई ठोस फैसला ही नहीं हुआ है तो फिर तबादला नीति को लेकर हंगामा करना हैरानी की बात है। कहा कि विपक्ष कह रहा है कि शिक्षकों को इस नीति से दिक्कत है लेकिन सच यह है कि दिक्कत शिक्षकों को नहीं बल्कि तबादला माफिया को है।
कहा कि जब सरकार तबादला नीति बनाएगी तो उससे पहले सभी हितधारकों व विधायकों से जरूर चर्चा करेगी। शिक्षा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक सदन से बाहर चले गए। इस दौरान ध्वनि मत से विपक्ष का कटौती प्रस्ताव गिर गया।
रूसा नहीं, सेमेस्टर प्रणाली को करेंगे खत्म
रूसा को लेकर उठे सवाल पर शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में रूसा को नहीं बल्कि उसके अंतर्गत चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम और सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली को खत्म कर वार्षिक प्रणाली शुरू करने की बात कही थी।
कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले इस पर फैसला ले लिया जाएगा। विपक्ष से सवाल किया कि सरकार गठन के तीन महीने में ही सबकुछ हो जाएगा क्या।
गुणवत्ता पर करेंगे फोकस
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार तो किया लेकिन गुणवत्ता पीछे छूट गई। स्वर्गीय राजा पदम सिंह का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अफसरों को पढ़ने के लिए लाहौर और लखनऊ तक भेजा आज शिक्षा के विस्तार के बीच गुणवत्ता पीछे छूट गई है।
कहा कि हाल यह है कि कहीं टीचर है तो बच्चे नहीं और जहां बच्चे हैं वहां शिक्षक ही नहीं है। कहा कि वर्तमान सरकार का पूरा फोकस शैक्षणिक संस्थाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर है।