अपने फैसले से पलटी सरकार, तीन कर्मचारियों पर हो गई पर मेहरबान
पूर्व वीरभद्र सरकार की तरह ही प्रदेश की नई जयराम सरकार सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर मेहरबान हो चली है। सरकार ने एक पूर्व मुख्य सचिव के पीए समेत तीन रिटायर्ड कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति प्रदान कर दी है।
खास बात यह है कि तीनों की नियुक्ति जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल की सहमति से दी गई है। सरकार बनने के बाद रिटायर अफसरों-कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति न देने के निर्णय पर यू टर्न लेने से सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।
सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा था कि वह नए हैं और उनकी सरकार नए कलेवर में काम करेगी। लेकिन, उनकी सरकार के निर्णयों में पिछली सरकार की छाया दिखनी शुरू हो गई है।
सरकार बनने के फौरन बाद सीएम जयराम ने एलान किया था कि सूबे में एक भी रिटायर्ड कर्मचारी को सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति नहीं दी जाएगी। इसके बाद कार्मिक और अन्य विभागों ने सैकड़ों की संख्या में कार्यरत रिटायर्ड कर्मचारियों-अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
पूर्व सीएम के स्टाफ को भी मिल चुका है सेवा विस्तार
इस कदम के बाद सरकार ने यू टर्न ले लिया है। अब सरकार कैबिनेट में ही पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार के मामले लाकर उन्हें मंजूरी प्रदान कर रही है।
हाल में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव के निजी सचिव रहे उमेद राम, ट्रेजरी में कार्यरत गोपाल चंद और 14 वें वित्त आयोग में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) रहे रिटायर्ड एचएएस अधिकारी अभय पंत को पुनर्नियुक्ति देते हुए 15 वें वित्त आयोग में फिर से ओएसडी लगा दिया है।
इन कर्मचारियों के अलावा कैबिनेट ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार के स्टाफ को भी रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार प्रदान किया है।
खास बात यह है कि यह निर्णय भी सरकार ने पिछली सरकार की तर्ज पर कैबिनेट में तो लिए लेकिन इन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया। जाहिर है पिछली सरकार की कैबिनेटों के दौरान होने वाले गोपनीय एजेंडे और निर्णयों की तर्ज पर ही भाजपा सरकार भी चलने लगी है।