37 हजार करोड़ कर्ज में डूबी सरकार, अब विधायकों से मांगे सुझाव
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करीब 37 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार ने सूबे के सभी विधायकों से फिजूलखर्ची घटाने के उपाय पूछे हैं। ये उपाय विधायकों को निर्धारित प्रारूप पर देने होंगे। विधायक इन उपायों को 30 और 31 जनवरी को होने जा रही विधायक प्राथमिकता बैठकों में रखेंगे। राज्य सरकार के योजना विभाग ने प्रदेश के सभी विधायकों को इन सुझावों को भेजने के लिए एक प्रारूप भेजा है।
योजना सलाहकार कार्यालय से जारी किए गए इस प्रारूप में वर्ष 2017-18 में फिजूलखर्ची को रोकने, वित्तीय संसाधनों को जुटाने, बेहतर प्रशासन चलाने आदि विषयों पर कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय विधायकों को सुझाव देने होंगे।
इन सुझावों को पांच बिंदुओं पर तीन-तीन पंक्तियों में देना होगा। निर्धारित प्रारूप पर विधायक को अपना नाम और साथ में निर्वाचन क्षेत्र का नाम भी देना होगा। विधायकों को तीन पंक्तियों में पहला सुझाव मितव्ययता को लेकर देना होगा।
वर्ष 2017-18 में वित्तीय संसाधन जुटाने, बेहतर प्रशासन को भी पूछा
दूसरा सुझाव वित्तीय संसाधन जुटाने और तीसरा बेहतर प्रशासन चलाने के लिए मांगा गया है। इसी तरह से चौथा सुझाव स्वरोजगार और श्रम रोजगार सृजित करने के लिए पूछा गया है। पांचवां किसी भी विकास क्षेत्र में नई नीति को अपनाने के लिए आमंत्रित किया गया है।
नए वित्त वर्ष के बजट आकलन को तय करने से पहले राज्य सरकार इन सुझावों पर गौर करेगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं योजना श्रीकांत बाल्दी ने पुष्टि की है कि 30 और 31 तारीख को हिमाचल प्रदेश के विधायक अपने अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताएं रखेंगे और साथ ही उनसे मितव्ययता और बेहतर प्रशासन आदि के लिए भी सुझाव मांगे गए हैं।