जेसीसी बैठक के फैसले का इंतजार: धूमल-वीरभद्र नहीं दे सके वरिष्ठता लाभ, अब जयराम पर आस
अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग का कहना है कि अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने से अनुबंध से नियमित कर्मचारी जूनियर हो रहे हैं और नियमित कर्मचारी प्रमोट होकर सीनियर हो रहे हैं। यह बहुत बड़ा भेदभाव है। सरकार को इसे जल्द दूर करना चाहिए।
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प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता का लाभ पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल और वीरभद्र सिंह की सरकारें नहीं दे सकीं। अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर इस लंबित मांग को पूरा करने की कर्मचारियों ने आस लगाई है। विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों की 27 नवंबर को होने वाली जेसीसी की बैठक के फैसले पर नजरें टिकी हैं। नियमित कर्मचारी वित्तीय लाभ की जगह सिर्फ वरिष्ठता दिए जाने की मांग बीते कई वर्षों से कर रहे हैं। अनुबंध कर्मचारी की वरिष्ठता तय करने का मापदंड नहीं होने से कर्मचारियों में भारी रोष है।
वर्ष 2007 के बाद संवैधानिक दर्जा प्राप्त कर्मचारी चयन आयोग व लोकसेवा आयोग के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को पूरा कर कर्मचारियों का चयन अनुबंध आधार पर किया जाने लगा। प्रदेश के इतिहास में पहली बार शुरूआत हुई जब एक पढ़े-लिखे युवा को लिखित परीक्षा पास कर और साक्षात्कार से गुजरने के बाद अनुबंध पर नौकरी मिली। पहले यह अनुबंध काल 8 वर्ष का था। तत्कालीन धूमल सरकार ने इसे केवल 2 वर्ष कम कर 6 वर्ष किया। कांग्रेस ने भी सत्ता में आकर अपने तीसरे बजट में जाकर अनुबंध कार्यकाल को 6 से 5 वर्ष किया।
अनुबंध कर्मियों के आंदोलन लगातार जारी रहे। वह इस चीज से बेहद खफा थे कि कमीशन और बैचवाइज भर्ती के बावजूद नाममात्र वेतन पर अनुबंध पर अपना समय बबार्द कर रहे हैं। राजनीतिक लाभ के चलते कांग्रेस ने फिर चुनाव के अंतिम वर्षों में अनुबंध कार्यकाल 5 से घटाकर 3 वर्ष कर दिया। तत्कालीन वीरभद्र सरकार के इस फैसले से अनुबंध की पीड़ा तो कम हुई लेकिन कांग्रेस सरकार ने अनुबंध कार्यकाल की गणना वरिष्ठता के लिए नहीं की। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने नीतिगत घोषणा पत्र में अनुबंध कर्मियों को 2 वर्ष के अनुबंध कार्यकाल के बाद नियमित करने का वादा किया था।
भेदभाव को दूर करे सरकार : मुनीष
अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग का कहना है कि अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने से अनुबंध से नियमित कर्मचारी जूनियर हो रहे हैं और नियमित कर्मचारी प्रमोट होकर सीनियर हो रहे हैं। यह बहुत बड़ा भेदभाव है। सरकार को इसे जल्द दूर करना चाहिए।
इस प्रक्रिया का कर्मचारी कर रहे हैं विरोध
मान लो सरकार 31 मार्च 2022 को 2 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमितीकरण की घोषणा करती है तो वर्ष 2020 में अनुबंध पर तैनात कर्मचारी 2022 को रेगुलर होंगे और 2019 में अनुबंध पर तैनात कर्मचारी भी 2022 को ही रेगुलर होंगे। 2019 में अनुबंध पर तैनात कर्मचारी, 2020 में तैनात अनुबंध कर्मचारी की तुलना में 1 वर्ष सीनियर रहना चाहिए लेकिन वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने से रेगुलर होने के बाद वे बराबरी पर आ जाएंगे।
घटते हुए अनुबंध काल के कारण 2012 में तैनात कर्मचारी 2017 में रेगुलर हुए और 2014 में तैनात अनुबंध कर्मचारी भी 2017 में ही रेगुलर हुए दोनों बराबरी पर आ गए। 2010 में तैनात 2016 में रेगुलर हुए, 2014 में तैनात 2017 में रेगुलर हुए। 2010 में तैनात कर्मचारी 2014 में तैनात कर्मचारियों की अपेक्षा 4 वर्ष सीनियर होने चाहिए थे लेकिन वे रेगुलर होने पर सिर्फ और सिर्फ 1 वर्ष सीनियर रह गए।