लोकायुक्त: सीएम से लेकर क्लास फोर तक सभी दायरे में
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शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक हल्के संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसे सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने इसके ड्राफ्ट पर तीन आपत्तियां जताईं। इनमें से दो को संशोधन में शामिल कर लिया गया। अब इसे भारत सरकार की मंजूरी के लिए दिल्ली भेजा जाएगा।
धूमल ने लोकायुक्त के अभियोजन मंजूरी देने के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ये प्रावधान सीआरपीसी की धारा 13(8) या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 से टकरा तो नहीं रहा? उन्होंने खातों का ऑडिट लोकायुक्त की मर्जी की अवधि के बजाए इसे सालाना करने का सुझाव दिया और साथ ही ये प्रावधान करने को कहा कि लोकायुक्त कुल मामलों की संख्या और जांच की प्रगति दोनों तरह की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करे।
लोकायुक्त के खातों का हर साल होगा ऑडिट
अभियोजन मंजूरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बारे में सीआरपीसी में भी संशोधन हो गया है, इसलिए ये प्रावधान आपस में नहीं टकराएंगे। लोकायुक्त के खातों का ऑडिट सालाना करवाने और वेबसाइट पर दोनों तरह की जानकारी देने के सुझाव को मुख्यमंत्री ने मान लिया।
वीरभद्र सिंह ने ये भी कहा कि सरकार ने पहले इस विधेयक को संयुक्त सेलेक्ट कमेटी को भेजा था। वहां चर्चा के बाद उसी ड्राफ्ट को सदन में लाया गया था, जिसे विधानसभा पहले भी पारित कर चुकी है। इसके बाद ध्वनि मत से इसे पारित कर दिया गया।
क्या होंगे अधिकार
लोकायुक्त विधेयक को केंद्रीय लोकपाल के प्रावधानों के अनुरूप बनाया गया है। यह एक सदस्यीय होगा और इसमें लोकायुक्त को अवमानना की कार्रवाई करने का अधिकार पहली बार दिया जा रहा है। लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री से लेकर क्लास फोर तक सभी पब्लिक सर्वेंट आएंगे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पूर्व भाजपा सरकार की ओर से लाए गए विधेयक को वापस लेकर नया बिल सदन में पेश किया था।
कौन देगा अभियोजन मंजूरी
लोकायुक्त में मुख्यमंत्री के खिलाफ केस आने पर अभियोजन मंजूरी विधानसभा सदन देगा। कैबिनेट मंत्रियों के मामले में यह मंजूरी मुख्यमंत्री देंगे। विधायकों के खिलाफ मामलों में विधानसभा अध्यक्ष फाइल क्लीयर करेंगे। इसी प्रकार चीफ सेक्रेटरी के मामले में मुख्यमंत्री और अन्य अफसरों के मामलों में मुख्य सचिव मंजूरी देंगे। सरकारी कर्मचारियों के मामले में विभागाध्यक्ष के पास यह अधिकार विधेयक में रखा गया है।