एसजेवीएन का एनटीपीसी में विलय नहीं चाहती सरकार, मंत्री ने विस में दी जानकारी
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सरकार एसजेवीएन का एनटीपीसी में विलय नहीं चाहती है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की ओर से लाए चर्चा प्रस्ताव पर ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकार की मंशा से अवगत कराया। कहा कि सरकार केंद्र को दो बार असहमति का पत्र भेज चुकी है।
एसजेवीएन लिमिटेड हाइड्रो प्रोजेक्ट करीब 6700 करोड़ की रिजर्व पूंजी और 1700 करोड़ सालाना राजस्व देने वाला उपक्रम है। ऊर्जा मंत्री ने सदन में बताया कि सरकार नहीं चाहती है कि भारत सरकार द्वारा एसजेवीएन लिमिटेड का एनटीपीसी में विलय हो।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 16 मार्च 2017 को पत्र से सरकार को एनटीपीसी द्वारा एसजेवीएन लिमिटेड के अधिग्रहण को इच्छा प्रस्ताव भेजा था। अब फिर से केंद्र ने अधिग्रहण की इच्छा जताई है।
23 जनवरी और 10 अक्तूबर को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रस्तावित अधिग्रहण पर असहमति जताते हुए केंद्र को पत्र लिखा कि जनता और सरकार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एसजेवीएन लिमिटेड का भारत सरकार और हिमाचल सरकार के संयुक्त उपक्रम की यथास्थिति में बदलाव न किया जाए।
पीएम और वित्त मंत्री को बताऊंगा सदन की मंशा : सीएम
चर्चा का उत्तर मुख्यमंत्री ने भी दिया। कहा कि इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का फोन आया था, लेकिन हमने अपनी मंशा जाहिर की थी कि उनका प्रस्ताव हमें स्वीकार्य नहीं है। वित्त मंत्री का कहना था कि एसजेवीएन प्रोजेक्ट को केंद्र संरक्षित करेगा।
प्रदेश सरकार का मानना है कि एनटीपीसी का हाइड्रो की दृष्टि से अनुभव कम है। एसजेवीएन प्रोजेक्ट को संरक्षित करने को लेकर केंद्र में विचार चल रहा है। मैं प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को सदन में एसजेवीएन प्रोजेक्ट का विलय न करने को लेकर विपक्ष की ओर जाहिर की गई मंशा को बताऊंगा।
विलय हुआ तो होगा हजारों करोड़ का नुकसान : मुकेश
चर्चा का प्रस्ताव लाते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल एसजेवीएन लिमिटेड का एनटीपीसी में विलय न होने दे। एसजेवीएन प्रोजेक्ट में हिमाचल का 26.8 फीसदी हिस्सा है। इससे हिमाचल को हर वर्ष 1700 करोड़ का राजस्व लाभ होता है।
प्रोजेक्ट के पास 6700 करोड़ की रिजर्व पूंजी है। तत्कालीन वीरभद्र सरकार के समक्ष भी केंद्र सरकार ने विलय का मामला उठाया था, लेकिन हमारे मंत्रिमंडल ने हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए उसे अस्वीकार कर दिया था।