छात्रवृत्ति फर्जीवाड़ा रोकने के लिए होगी अब कड़ी निगरानी
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हिमाचल में 250 करोड़ से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद सरकार ने इसके आवंटन के लिए निगरानी कड़ी कर दी है। छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच के लिए अब शिक्षण संस्थानों के स्तर पर मानीटरिंग कमेटियां गठित की जाएंगी। इन कमेटियों की सिफारिश के बाद ही शिक्षा विभाग छात्रवृत्ति की राशि जारी करेगा।
अगर कोई शिक्षण संस्थान फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति लेने के लिए आवेदन करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। भविष्य में ऐसे संस्थान को केंद्र और राज्य सरकार की किसी भी छात्रवृत्ति योजना के तहत शामिल नहीं किया जाएगा। मंगलवार को इस बाबत उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने सभी निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रभारियों को आदेश जारी कर दिए हैं।
छात्रवृत्ति घोटाला पकड़ में आने के बाद फजीहत झेल रहे शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षण संस्थानों को पांच सदस्यीय मानीटरिंग कमेटियां गठित करने को कहा है। छात्रवृत्ति राशि के लिए आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों के दस्तावेजों की ये कमेटियां जांच करेंगी। इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर ही शिक्षा निदेशालय छात्रवृत्ति राशि जारी करेगा। अगर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोई संस्थान छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करता है और कमेटी उसे आगे भेज देती है तो संस्थान ब्लैक लिस्ट होगा और कमेटी पर भी कार्रवाई की जाएगी।
उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया कि मानीटरिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही निदेशालय छात्रवृत्ति का पैसा जारी करेगा। अगर कोई संस्थान कमेटी की रिपोर्ट नहीं भेजेगा तो उस संस्थान को छात्रवृत्ति राशि नहीं दी जाएगी। इसके लिए संस्थान स्वयं जिम्मेवार होंगे।