खतरे में पड़ी 2630 शिक्षकों की नौकरी, 108 स्कूलों में लटकेंगे ताले
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात 2630 शिक्षक शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के आधार पर नियुक्त 2630 शिक्षकों को जयराम सरकार ने सेवा विस्तार नहीं दिया है।
सेवा विस्तार नहीं मिलने के चलते राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित पहली से जमा दो कक्षा वाले 108 सरकारी स्कूलों में दो अप्रैल से ताले लटकने की नौबत आ गई है। 31 मार्च को इन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो गई हैं।
पूर्व सरकार हर साल इनको सेवा विस्तार देती रही। लाहौल-स्पीति, पांगी, भरमौर, किन्नौर सहित कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा और सिरमौर जिले में स्थित इन 108 स्कूलों में शिक्षकों का पूरा स्टाफ ही एसएमसी के आधार पर भरा गया है। अब सेवा विस्तार न मिलने से एसएमसी शिक्षक स्कूलों में नहीं जा सकेंगे।
कैबिनेट बैठक में हैं आसार
साल 2012 में प्रदेश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में स्थित ऐसे सरकारी स्कूलों में एसएमसी शिक्षकों को तैनात किया गया, जहां नियमित शिक्षक सेवाएं देने से परहेज करते थे। पूर्व सरकार इन शिक्षकों को एक-एक साल का सेवा विस्तार देती आई है।
लेकिन जयराम सरकार ने इस बार सेवा विस्तार नहीं दिया है। शीतकालीन स्कूलों में नियुक्त एसएमसी शिक्षकों का सेवा विस्तार 31 दिसंबर 2017 को समाप्त हो चुका है, जबकि ग्रीष्मकालीन स्कूलों में 31 मार्च को सेवा विस्तार समाप्त हुआ है। अब दो अप्रैल से एसएमसी शिक्षक स्कूलों में सेवाएं नहीं दे सकेंगे।
एसएमसी पर आधार पर इतने शिक्षक तैनात
दो अप्रैल को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक में एसएमसी शिक्षकों को सेवा विस्तार मिलने के आसार हैं। विधानसभा में सरकार ने एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाने की घोषणा की है। ऐसे में संभावित है कि दो अप्रैल की बैठक में शिक्षकों को सेवा विस्तार देते हुए आगामी दिनों में नीति पर भी फैसला होगा।