किशन कपूर के खिलाफ केस बंद होने का रास्ता अब साफ
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हिमुडा के चेयरमैन रहते प्लॉट आवंटन मामले में मंत्री किशन कपूर के खिलाफ जांच बंद होने का रास्ता साफ हो गया है। बीते शुक्रवार को सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान विजिलेंस की ओर से मामला दर्ज कराने वाले तत्कालीन एसपी डॉ. खुशहाल शर्मा ने केस बंद होने पर अनापत्ति कोर्ट में दर्ज करा दी है। अनापत्ति बयान दर्ज होने के बाद अब केस बंद होने में सिर्फ कोर्ट का निर्णय रह गया है।
सूत्रों का कहना है कि चूंकि जांच एजेंसी जांच बंद करना चाहती है और मामला दर्ज कराने वाले वादी ने भी कोई आपत्ति नहीं की है, ऐसे में मामला बंद होना तय है। बीते शुक्रवार को सुनवाई के दौरान विजिलेंस ब्यूरो की ओर से जिला न्यायवादी सुनील वासुदेवा पेश हुए थे। जयराम सरकार में मंत्री किशन कपूर के खिलाफ पिछली वीरभद्र सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था।
आरोप था कि 2008 में तत्कालीन धूमल सरकार में शहरी विकास मंत्री एवं हिमुडा के चेयरमैन रहे किशन कपूर ने अपने और पत्नी के अलावा कुछ अन्य लोगों को डिस्क्रीशनरी अधिकार के तहत प्लॉट आवंटित कर दिए। विवाद बढ़ा तो कपूर ने प्लॉट वापस कर दिया। मामले में हिमुडा के तत्कालीन सीईओ एसके शर्मा पर भी इसमें निदेशक मंडल की मंजूरी न लेने का आरोप लगा।
वीरभद्र सरकार के दौरान प्रारंभिक जांच में आरोप लगने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने कपूर और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, लेकिन वीरभद्र सरकार में ही जांच ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद जयराम सरकार आते ही ब्यूरो की ओर से सरकारी वकील सुनील वासुदेवा ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। दलील दी गई कि मामले में साक्ष्य नहीं मिले, ऐसे में मामला बंद कर दिया जाए। अब मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी, जिसमें कोर्ट विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट पर अपना फैसला सुना सकता है।