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हिमाचल में 50 फीसदी नहीं, सभी बसें चलाने का प्रस्ताव

Fri, 15 May 2020 04:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 15 May 2020 04:26 PM IST
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Himachal Government proposal for all buses will be operational
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल में 50 फीसदी नहीं, बल्कि सभी सरकारी और निजी बसों को चलाने का प्रस्ताव है। परिवहन विभाग और निगम के अफसरों ने सरकार को स्थिति स्पष्ट की है कि अगर 50 फीसदी बसें चलाई जाती हैं तो इससे बसों में सवारियों की भीड़ बढ़ेगी, सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का भी पालन नहीं हो पाएगा।

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ऐसे में ज्यादा से ज्यादा बसें चलाकर ही फायदा हो सकेगा। बसों में अति जरूरतमंद लोग ही सफर कर सकें, इसके लिए किराया बढ़ाया जाना आवश्यक है। अफसरों ने सरकार को यह भी बताया कि 40 सीटर बस में अगर 20 लोगों को बैठाया जाता है तो परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटरों की इनकम में कोई कमी नहीं आएगी।
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किराया बढ़ने से ऑपरेटरों को 40 सीट का किराया मिलेगा। वर्तमान प्रदेश में 33 सौ के करीब सरकारी और 31 सौ के करीब प्राइवेट बसें हैं। बसें करीब ढाई महीने से सड़कों पर खड़ी हैं। ऑपरेटरों को जेब से लोन की किस्तें देनी पड़ रही हैं। ऐसे में 50 निजी ऑपरेटरों की बसें चलना भी मुश्किल हो जाएगा। 
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परिवहन सेवाएं शुरू करने को विभाग तैयार 
परिवहन विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने कहा कि हिमाचल के सभी आरटीओ ऑफिस में सैनिटाइजर और मास्क पहुंचा दिए गए हैं। बसों को दिन में 3 बार सैनिटाइज किया जाएगा। सभी जिला आरटीओ कार्यालय में कोरोना से बचाव करने का सामान उपलब्ध है।

बसें चलाने के लिए परिवहन निगम की तैयार पूरी 

सरकार ने हिमाचल में बसें चलाने की तैयारी कर ली है। एचआरटीसी कर्मचारियों, चालक-परिचालकों के लिए 50 हजार मास्क की व्यवस्था की है। इसमें एचआरटीसी ने स्वयं अब तक 16 हजार मास्क बना दिए हैं। यह जानकारी परिवहन मंत्री गोविंद ने दी।  उन्होंने कहा कि सरकार बस अड्डों पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की जा रही है। एचआरटीसी व निजी बसें चलाने से पहले चालकों व परिचालकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार कई निर्णय ले रही है। बस सेवा शुरू करने पर आगे वाले दरवाजे से चालक व परिचालक ही चढ़ेंगे।

यात्री पीछे के दरवाजे से ही चढ़ेंगे और उतरेंगे। कोरोना संकट में अब तक एचआरटीसी को 130 करोड़ का नुकसान हो चुका है। हर महीने 75 करोड़ का नुकसान हो रहा है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद सरकार बसें चलाने पर फैसला लेगी। बस किराया बढ़ाने को लेकर उन्होंने कहा कि अफसरों और निजी ऑपरेटरों की ओर से सुझाव आए है। अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। फैसला कैबिनेट को लेना होता है। सुझाव और चर्चा होती रहती है। 

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