तबादला नीति पर प्रस्ताव तैयार, बैकफुट पर प्रदेश सरकार
शिक्षकों के लिए तबादला नीति बनाने के लिए अफसरशाही का प्रस्ताव पूरी तरह से तैयार है लेकिन जयराम सरकार इसको लेकर बैकफुट पर आ गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के दृष्टि पत्र और सरकार बनने के बाद तैयार किए गए सौ दिनों के एजेंडे में तबादला नीति बनाने का उल्लेख किया गया। दृष्टि पत्र को सरकार का नीतिगत दस्तावेज भी बना दिया गया है।
इसके बावजूद भी सरकार तबादला नीति पर फैसला नहीं ले पा रही है। भाजपा को प्रदेश की सत्ता संभाले चार माह का समय हो गया है। इस दौरान शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज अपने सरकारी आवास से लेकर सचिवालय तक तबादला करवाने के लिए आने वाले लोगों से ही अधिकांश समय घिरे रहते हैं। दोनों शिक्षा निदेशकों के पास निदेशालय में भी तबादलों की फाइलों के ही ढेर लगे हैं। शिक्षा क्षेत्र में काम करने के लिए किसी को भी समय नहीं मिल पा रहा है।
भारद्वाज तो सचिवालय में आयोजित एक बैठक के दौरान तबादलों के काम के चलते बढ़ी परेशानियों को लेकर सार्वजनिक तौर पर बयान भी दे चुके हैं। लेकिन इन सब परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार तबादला नीति का बड़ा फैसला लेने से गुरेज ही कर रही है। जबकि अफसरशाही का तबादले करने के लिए प्रस्ताव पूरी तरह से तैयार है।
सचिवालय में धूल फांक रहा है सॉफ्टवेयर
भाजपा के दृष्टि पत्र को सरकार का नीतिगत दस्तावेज बनाने के बाद सचिवालय स्तर पर तबादला नीति को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। शिक्षक संगठनों से भी इस बाबत बैठकें की गई हैं।
अन्य राज्यों के मॉडल को स्टडी कर तबादले करने के लिए सॉफ्टवेयर भी पूरी तरह से तैयार है। लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते यह साफ्टवेयर सचिवालय में धूल ही फांक रहा है।