सरकारी महकमों में रुकेगी फिजूलखर्ची, विश्व बैंक के साथ हुआ समझौता
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हिमाचल में फिजूलखर्ची को रोका जाएगा और कर प्रशासन दक्षता में सुधार लाया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने विश्व बैंक के साथ 36 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हिमाचल में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन निर्माण कार्यक्रम लाया जाएगा। यह समझौता सार्वजनिक व्यय प्रबंधन और कर प्रशासन की दक्षता में सुधार करेगा।
हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन क्षमता निर्माण कार्यक्रम को भारत ने 36 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आईबीआरडी ऋण के लिए विश्व बैंक के साथ नई दिल्ली में वीरवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
भारत सरकार से आर्थिक मामले विभाग के संयुक्त सचिव एमआई राजकुमार और विश्व बैंक भारत से कंट्री निदेशक जुनैद कमल अहमद ने हस्ताक्षर किए। कार्यान्वयन संस्था समझौते पर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त निदेशक, कोषागार, लेखा एवं लॉटरी और विश्व बैंक की ओर से भारत से कंट्री निदेशक ने हस्ताक्षर किए।
हिमाचल में चलेगा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन क्षमता निर्माण कार्यक्रम
इस परियोजना का उद्देश्य हिमाचल में सार्वजनिक व्यय प्रबंधन और कर प्रशासन व्यवस्था की दक्षता में सुधार करना है। बजट की विश्वसनीयता में सुधार, राजकोषीय अनुशासन की व्यवस्था, प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने, राजकोषीय स्थिति बढ़ाने के लिए राजस्व प्रशासन में सुधार और मानव संसाधन सुधार सहित लक्षित सांगठनिक सुधारों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम योगदान देने की उम्मीद है।
यह कार्यक्रम हिमाचल सरकार की ओर से कार्यक्रम की तैयारियों के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ की गई कार्यशालाओं में व्यक्त एवं चिन्हित किए गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करता है। इस कार्यक्रम पर कुल 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसमें से 36 मिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्तपोषण विश्व बैंक की ओर से किया जाएगा। बकाया धनराशि का प्रबंधन राज्य के बजट से किया जाएगा। इस कार्यक्रम के पूरा होने की अवधि पांच वर्ष है।