हिमाचल: पहली बार सरकार में बैठेगा नालागढ़ का विधायक, जानें पूरा मामला
नालागढ़ के इतिहास में दूसरी बार उपचुनाव हुआ और दोनों बार कांग्रेस के प्रत्याशी विजेता रहे।
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हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ के इतिहास में दूसरी बार उपचुनाव हुआ और दोनों बार कांग्रेस के प्रत्याशी विजेता रहे। 2011 में भाजपा के स्वर्गीय हरि नारायण सैणी के निधन के बाद यहां पर उप चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के लखविंद्र राणा जीते थे। इस बार आजाद प्रत्याशी केएल ठाकुर के त्यागपत्र के बाद हुए उपचुनाव में दूसरी बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। अभी तक नालागढ़ में विधायक अगर भाजपा का होता था तो सरकार कांग्रेस की होती थी।
अगर सरकार भाजपा की भी हुई तो विधायक दूसरे पार्टी का रहा। इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि कांग्रेस की प्रदेश में सरकार है और नालागढ़ में विधायक भी कांग्रेस का ही बना है। यह चुनाव किसी बड़े विकासात्मक मुद्दे की बजाय राजनीतिक मुद्दे पर ज्यादा रहा। भाजपा हर मंच से कहती रही कि कांग्रेस सरकार ने विकास नहीं किया और संस्थान बंद किए, तो आजाद विधायक को त्यागपत्र देना पड़ाष वहीं कांग्रेस कहती रही कि विधायक ने जनमत को ठुकराकर अपने हित के लिए त्यागपत्र दिया। इसका जनता पर बोझ पड़ा।
आजाद विधायक अर्जुन सिंह ही कर पाए कार्यकाल पूरा
यहां पर तिकोना मुकाबला था। आजाद प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 1967 में पहली बार अर्जुन सिंह गोरखा नालागढ़ से विधायक बने थे और उन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उसके बाद वर्ष 2022 में केएल ठाकुर आजाद विधायक बने। लेकिन केएल ठाकुर ने करीब 15 महीने बाद ही त्यागपत्र दे दिया। दोबारा हुए उप चुनाव में केएल ठाकुर को हार का मुंह देखना पड़ा।
2022 में भी हुआ था दिलचस्प मुकाबला
वर्ष 2022 का चुनाव भी बहुत दिलचस्प रहा था। कांग्रेस से हरदीप बाबा, भाजपा से लखविंद्र राणा व केएल ठाकुर आजाद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे, लेकिन आजाद केएल ठाकुर दोनों दलों के उम्मीदवारों पर भारी पड़े थे और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हरदीप बावा को 13264 मतों से हरा दिया था। इस चुनाव में केएल ठाकुर को 33427, हरदीप बावा को 20163 व लखविंद्र राणा को 17273 मत पड़े थे।