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Himachal: नदी-खड्डों के पास निर्माण तबाही का कारण, 2016 में नदी से 25 मीटर दूर निर्माण का नियम लागू

Sat, 15 Jul 2023 10:33 AM IST
अरविन्द ठाकुर त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 15 Jul 2023 10:33 AM IST
सार

नदी और खड्डों में निर्माण को लेकर जुलाई 2016 में एक्ट लागू हुआ। इससे पहले से ही बहुत सा निर्माण हो चुका था। बाद में भी कई लोगों ने जबरदस्ती निर्माण किए। इसका नतीजा अब भुगतना पड़ा है।

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Himachal Flash Floods national green tribunal directions no construction in 25 meter area of river
हिमाचल में बारिश से तबाही। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एनजीटी के मुताबिक नदी, खड्ड और नालों से 25 मीटर की दूरी पर ही निर्माण किया जा सकता है। मंडी में ब्यास किनारे इन नियमों का पालन नहीं हुआ है। नदी के किनारों पर अधिकतर मकान एक्ट बनने से पहले निर्मित हो चुके थे। बाद भी में नियमों को दरकिनार कर नदी और खड्डों के किनारे कई मकान अवैध रूप से बनाए गए। अब जब ब्यास ने रौद्र रूप दिखाया तो ये निर्माण या तो बह गए हैं या फिर इस तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं कि नुकसान की पूर्ति होना कठिन है।

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नदी और खड्डों में निर्माण को लेकर जुलाई 2016 में एक्ट लागू हुआ। इससे पहले से ही बहुत सा निर्माण हो चुका था। बाद में भी कई लोगों ने जबरदस्ती निर्माण किए। इसका नतीजा अब भुगतना पड़ा है। मंडी में अधिकतर निर्माण कार्य से संबंधित क्षेत्र नगर निगम के पास हैं, जबकि कुछ क्षेत्र टाउन एंड कट्री प्लानिंग के पास है। नगर निगम का कहना है कि नए निर्माण कार्य के लिए नियम के तहत ही अनुमति और एनओसी दी जाती है। पहले हो चुके निर्माण के बारे में वे क्या कह सकते हैं। टाउन एंड कंट्री के अधिकारियों का कहना है कि वे नियम के तहत ही निर्माण की अनुमति देते हैं।
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इन वार्डों में सबसे ज्यादा तबाही मंडी में ब्यास के साथ बहुत अधिक वार्ड सटे हैं। यहां पर नदी से 25 मीटर दूरी की शर्त लागू नहीं हुई है। इन वार्डाें से बहुत मकान, दुकानें, बस्तियां और सरकारी कार्यालय बहे हैं। सबसे ज्यदा भ्यूली में मकान बहे हैं। इससे लोगों की जीवनभर की पूंजी तबाह हुई है। पुरानी मंडी, खलियार में वन विभाग के आवासों के अलावा कई मकान बहे हैं। पड्डल, सौली खड्ड और रघुनाथ पधर में भी ब्यास की चपेट में आने से बहुत अधिक नुकसान हुआ है। कई मकानों की दो-दो मंजिलों तक रेत और सिल्ट घुस जाने से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
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नदी, नालों में निर्माण का ये है नियम
अगर कोई नदी-नालों के किनारों पर निर्माण करना चाहता है तो उसे सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि वह वहां से 25 मीटर की दूरी पर है या नहीं। इसके अलावा कभी भी अवैध निर्माण न हो, मकान के चारों तरफ तीन मीटर सामने और दो मीटर पीछे की तरफ दूसरे की जमीन से दूरी होनी चाहिए। इसके अलावा नक्शा पास होने और टाउन एंड कंट्री प्लानर की एनओसी के बाद ही निर्माण किया जा सकता है। नगर निगम के उप महापौर वीरेंद्र भट्ट का कहना है कि अब नए नियम के तहत ही निर्माण के लिए अनुमति दी जा रही है।

कौन है जिम्मेदार, क्या कहते हैं जानकार
अवैध निर्माण के लिए विभागीय अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदार हैं। वे लालचवश इस तरह से मकानों के नक्शे पास कर देते हैं और अवैध निर्माण करने की अनुमति देते हैं। - आकाश शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता


नदी और नालों में निर्माण करना बहुत ही गलत है। आज ही नहीं पहले भी नदी के रास्ते में जो भी निर्माण हुए हैं उनको बर्बाद होते हुए देखा है। बार-बार ब्यास निशानदेही कर रही है। फिर भी लोग नहीं मान रहे हैं, नतीजा सबके सामने है। - बुद्धिजीवी शर्मा, वरिष्ठ नागरिक

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