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हिमाचल: अनुबंध काल को वरिष्ठता में शामिल नहीं करने को कोर्ट में चुनाैती देंगे कर्मचारी

Tue, 25 Feb 2025 11:30 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Feb 2025 11:30 AM IST
सार

सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से अनुबंध की ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिए जाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से ये सब याचिकाएं नए कानून बनने से पहले दायर कर दी थीं। 

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Himachal: Employees will challenge in court the non inclusion of contract period in seniority
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों की ओर से जल्द ही सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक 2024 को चुनौती दी जाएगी। इससे पहले अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता व वित्तीय लाभ से जुड़े कई मामले अदालत में सुनवाई के लिए लगे हैं। सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से अनुबंध की ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिए जाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से ये सब याचिकाएं नए कानून बनने से पहले दायर कर दी थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर ये अब सरकार के दिसंबर 2024 में बनाए कानून को चुनौती दी जाएगी।

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विधानसभा में दिसंबर में विधेयक पारित करवाया गया, जिसमें 2003 के बाद भर्ती अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ न देने की बात की गई है। इसके तहत 2003 के बाद ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता का लाभ उनके नियमित होने के बाद ही मिलेगा। अनुबंध सेवाकाल को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। इसको अब हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। वहीं सरकार अनुबंध सेवाकाल का लाभ नोशनल देने की बात पहले ही कह चुकी है। राज्यपाल की ओर से 7 फरवरी को संशोधन विधेयक 2024 को मंजूरी दी गई थी।

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पहले की दायर याचिकाओं को लिया वापस
हाईकोर्ट की न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने संशोधित विधेयक के माध्यम से कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनके तहत कर्मियों को ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा। साथ ही कर्मचारियों की वरिष्ठता उनके नियमित होने पर ही तय होगी। अनुबंध सेवाकाल को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। इसकी वजह से अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं को वापस लिया गया। अदालत ने साथ ही याचिकाकर्ताओं को नए सिरे से याचिकाओं को दायर करने की स्वतंत्रता दी। अदालत में अनुबंध सेवाकाल को वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और वित्तीय लाभ से जुड़ी हजारों याचिकाएं विचाराधीन हैं।

विधि विवि कर्मियों को लेकर सुनवाई 5 को
 प्रदेश हाईकोर्ट में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घंडल से हटाए कर्मचारियों के मामले में अब 5 मार्च को सुनवाई होगी। विश्वविद्यालय की ओर से हटाए कर्मचारियों में से अभी तक 64 के करीब लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया है। विधि विश्वविद्यालय की ओर से कुछ कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2024 और कुछ को इससे पहले हटाया गया है। इनमें से कुछ कर्मचारियों को दैनिक वेतन भोगी और कुछ को आउटसोर्स पर तैनात किया था। इसे लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाॅल दुआ की अदालत ने की। विश्वविद्यालय नई भर्तियां की जगह दैनिक वेतनभोगी ही रख रहे हैं। विधि विश्वविद्यालय की ओर से 8 और 9 जनवरी को आउटसोर्स और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाले थे। विज्ञापनों को चुनौती दी है।

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