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चुनावी मुद्दा: हिमाचल में करुणामूलक नौकरियों के लिए प्रभावित परिवारों का खत्म नहीं हुआ इंतजार

Wed, 02 Nov 2022 10:55 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, शिमला
विपिन काला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 02 Nov 2022 10:55 AM IST
सार

प्रदेश सरकार ने करुणामूलक  मामलों में नौकरी के लिए आश्रित परिवार की आय सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना तक कर दी है। बावजूद इसके, सरकारी सेवा के दौरान मरे कर्मचारियों के आश्रितों को करुणामूलक नौकरियां नहीं मिल पाई है। 

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हिमाचल विधानसभा चुनाव मुद्दा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में पिछले कई साल से सैकड़ों प्रभावित परिवारों के सदस्य सरकारी विभागों में करुणामूलक नौकरियों की बाट जोह रहे हैं। प्रदेश सरकार ने ऐसे मामलों में नौकरी के लिए आश्रित परिवार की आय सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये सालाना तक कर दी है। बावजूद इसके, सरकारी सेवा के दौरान मरे कर्मचारियों के आश्रितों को करुणामूलक नौकरियां नहीं मिल पाई है। सूबे की सत्ता पर सरकारें बदलती चलीं गईं, लेकिन इस मामले में कोई समाधान या ठोस नीति नहीं बन पाई है।  करुणामूलक नौकरी के लिए मृतक कर्मचारियों के आश्रित जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक आंदोलन करते रहे हैं, परंतु उनकी सुनवाई सरकार में नहीं हो सकी है। प्रभावित परिवारों से जुड़े आश्रितों को अपनी नाराजगी जताते के लिए लंबे समय तक क्रमिक अनशन तक करना पड़ा है। विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होते ही आश्रितों को अपना अनशन 7 अक्तूबर को स्थगित करना पड़ा है। राज्य के अधिकांश सरकारी विभागों में मृतक कर्मचारियों के आश्रित परिजन नौकरी पर नहीं लगाए गए हैं। 

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दो दशक में भी नहीं दी जा सकीं तृतीय श्रेणी की नौकरियां 
- राज्य के सरकारी विभागों में पिछले बीस साल से करुणामूलक आधार पर आश्रितों को तृतीय श्रेणी के पदों पर नौकरी नहीं दी जा सकी है। ये प्रभावित परिवार सरकार से हर स्तर पर मामला उठा चुके हैं। जल शक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अधिकांश बड़े विभागों में करुणामूलक के मामले लंबित हैं।
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राजधानी में 432 दिन तक चला क्रमिक अनशन  
करुणामूलक नौकरी लेने के लिए प्रभावित परिवारों को राजधानी शिमला में 432 दिन तक क्रमिक अनशन करना पड़ा। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद यह अनशन स्थगित किया गया है। इससे पहले जिला स्तर पर भी आंदोलन चलाए गए। मुख्यमंत्री, मंत्री, अफसरों से कई बार वार्ता की गई परंतु कोई सफलता नहीं मिली। 
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आज भी 3,000 से अधिक मामले लंबित
राज्य के सरकारी विभागों में करुणामूलक नौकरी देने के 3000 मामले पिछले कई साल से लंबित हैं। चतुर्थ श्रेणी पदों पर करुणामूलक के 1800 पद तो भरे गए परंतु तृतीय श्रेणी के पदों पर कोई नियुक्ति सरकार ने नहीं की। इससे आश्रितों में खासी नाराजगी है। 


क्या कहते हैं करुणामूलक संघ के मुख्य सलाहकार
- हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ के मुख्य सलाहकार शशि पाल कहते हैं कि प्रदेश में करुणामूलक आधार पर बीस साल से तृतीय श्रेणी पदों पर नौकरी नहीं दी गई हैं। सरकार ने 2.50 लाख रुपये की आय सीमा करुणामूलक नौकरी देने के लिए तय की हुई है। यह आय सीमा बढ़ाने के बाद भी तृतीय श्रेणी के पदों पर नौकरी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि 432 दिन का क्रमिक अनशन आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण आंदोलन स्थगित किया गया है।

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