महत्वाकांक्षा छोड़ें नेता, पार्टी का हाथ करें मजबूत: राठौर
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मतभेद और मनभेद भूल जाइए। पार्टी के हाथ मजबूत करने के लिए कांग्रेस नेता महत्वाकांक्षा को पालना छोड़ दें। इसी पार्टी ने कई को फर्श से अर्श तक पहुंचाया है। यह कठिन वक्त है सत्तारूढ़ दल से दो-दो हाथ कर जनता जनार्दन तक कांग्रेस की आवाज पहुंचाने का। पार्टी में गुटबाजी, चुनौतियों और इसकी दशा-दिशा पर बतौर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एक साल पूरा करने के बाद कुलदीप सिंह राठौर ने अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता अनिमेष कौशल से खुलकर बातचीत की। पेश हैं कुछ अंश :
दो महीने बीत गए, प्रदेश कार्यकारिणी कब गठित करेंगे?
हाईकमान दिल्ली विधानसभा चुनाव में व्यस्त है। महत्वाकांक्षी लोग जोड़े जाएंगे, अति महत्वाकांक्षी लोगों से पार्टी दूरी बनाएगी। क्षेत्रीय संतुलन बनाया जाएगा। युवाओं को मौका देंगे, वरिष्ठ नेताओं को भी दरकिनार नहीं किया जाएगा।
भितरघात के आरोपों पर सुधीर पर क्या कार्रवाई की?
2022 के विधानसभा चुनाव में क्या वीरभद्र सिंह चेहरा होंगे?
पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा धर्मशाला उपचुनाव में ऐन मौके पर पीछे हट गए। पार्टी प्रत्याशी विजय इंद्र करण ने अपनी हार के लिए सुधीर को जिम्मेदार ठहराया है। जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। अब हाईकमान को फैसला लेना है।
2022 के विधानसभा चुनाव में क्या वीरभद्र सिंह चेहरा होंगे?
पार्टी चुनाव लड़ेगी और छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का मार्गदर्शन और आशीर्वाद साथ रहेगा। वीरभद्र ने मुझ पर भरोसा जताते हुए पीठ थपथपाई है।
सत्ता में वापसी की क्या योजना है?
राहुल गांधी के दिए एजेंडे पर काम कर रहा हूं। सभी नेताओं को एक साल में साथ लाने में सफल रहा हूं। आम कार्यकर्ताओं से संपर्क साधा है। प्रदेश में कांग्रेस लगातार मजबूत हो रही है।
आप भी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
मेरे हलके ठियोग-कुमारसेन से जेबीएल खाची, विद्या स्टोक्स जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। मैंने कभी टिकट नहीं मांगा। किसी को अस्थिर नहीं किया। अब स्टोक्स का मुझे आशीर्वाद है। पहले संगठन को मजबूत करना है, 2022 में जैसा हाईकमान कहे।
बिंदल का चुनावी मैनेजमेंट जबरदस्त है, कैसे निपटेंगे आप?
बिंदल प्रबंधन में माहिर होंगे राजनीति में नहीं। पच्छाद उपचुनाव में कांग्रेस की मजबूती का सामना कर चुके बिंदल इससे वाकिफ हैं। उनको भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनने पर अग्रिम बधाई। कांग्रेस बिंदल के प्रबंधन से दो-दो हाथ करने को तैयार है।
जयराम सरकार के दो साल पर क्या कहेंगे?
सरकार का दो साल का कार्यकाल निराशाजनक रहा। बेरोजगारी, महंगाई और नशे का कारोबार बढ़ा। कर्ज लेकर वेतन दिया जा रहा है। इन्वेस्टर्स मीट के नाम पर करोड़ों बरबाद कर दिए। एमओयू के आंकड़ों का भ्रम फैला रहे हैं। देवभूमि की बेशकीमती जमीन बेचने को रेरा गठित कर दिया।