फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Congress lost another strong leader 113 days after Virbhadra's death

मंत्री रहते जीएस बाली की वीरभद्र सिंह से कई मसलों पर थी खटास, फिर भी बनाई अलग पहचान

Sun, 31 Oct 2021 01:39 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 31 Oct 2021 01:39 AM IST
सार

आठ जुलाई को वीरभद्र सिंह का देहांत हुआ था। 29 अक्तूबर को कांग्रेस ने दूसरे बडे़ नेता के रूप में जीएस बाली को खो दिया। तत्कालीन सीएम से उनकी कई मसलों पर खटास रही। हालांकि, अपने विभाग से संबंधित काम करवाने के लिए वह नरम भी हो जाते थे। बाली कांग्रेस सरकार में तेजतर्रार मंत्री रहे हैं। उन्हें कई बड़े फैसलों के लिए जाना जाएगा। 

विज्ञापन
Himachal Congress lost another strong leader 113 days after Virbhadra's death
पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह व पूर्व मंत्री जीएस बाली(फाइफ) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत के 113 दिन बाद कांग्रेस ने एक और कद्दावर नेता को खो दिया है। आठ जुलाई को वीरभद्र सिंह का देहांत हुआ था। 29 अक्तूबर को कांग्रेस ने दूसरे बडे़ नेता के रूप में जीएस बाली को खो दिया। तत्कालीन सीएम से उनकी कई मसलों पर खटास रही। हालांकि, अपने विभाग से संबंधित काम करवाने के लिए वह नरम भी हो जाते थे। बाली कांग्रेस सरकार में तेजतर्रार मंत्री रहे हैं। उन्हें कई बड़े फैसलों के लिए जाना जाएगा। बाली हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के बडे़ नेताओं में गिने जाते थे। सबसे बड़े जिला कांगड़ा से भी वह कांग्रेस के बड़े नेता थे।

विज्ञापन


शुरू में उनके वीरभद्र सिंह के साथ अच्छे संबंध थे। बाद में जब प्रदेश में धूमल सरकार थी तो बाली पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के समानांतर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में भी शुमार हुए। फिर जब वर्ष 2012 में वीरभद्र सरकार सत्ता में आई तो बाली को उन्होंने परिवहन और खाद्य आपूर्ति जैसे विभागों का जिम्मा दिया। अपने विभागों से संबंधित मांगें मनवाने के लिए बाली अपने सीएम से भी भिड़ जाते थे। वीरभद्र कैबिनेट की कई बैठकों में बाली तल्ख नजर आए। हालांकि, वीरभद्र से कई मसलों पर खटास रहने के बावजूद वह अपने काम को करवाने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष नरम भी होते रहे, जिसे उनकी कूटनीतिक माना जाता था। अफसरशाही पर उनकी मजबूत पकड़ थी।  
विज्ञापन


विक्रमादित्य के खिलाफ बेटे को खड़ा किया युकां चुनाव में 
जीएस बाली अपने बेटे रघुवीर सिंह बाली को भी सियासत में आगे लाने के लिए संघर्षरत रहे। वीरभद्र सरकार के समय में विक्रमादित्य सिंह ने युवा कांग्रेस का चुनाव लड़ा उनके खिलाफ जीएस बाली ने अपने पुत्र रघुवीर सिंह बाली को चुनाव में उतारा। इस दौरान भी वीरभद्र और बाली के संबंधों में खटास आई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


रघुवीर सिंह बाली संभाल सकते हैं बाली की सियासी विरासत 
जीएस बाली के पुत्र रघुवीर बाली अपने पिता की सियासी विरासत संभाल सकते हैं। वह सुखविंद्र सुक्खू के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहते प्रदेश कांग्रेेस कमेटी के सचिव बन गए थे। नगरोटा बगवां में जीएस बाली चुनाव हार गए थे। पिछले कुछ अरसे से अस्वस्थ होने से भी पार्टी के क्रियाकलापों को बहुत वक्त नहीं दे पा रहे थे। 


होर्डिंग में फोटो न लगाने पर वीरभद्र समर्थकों के निशाने पर इस बार भी रहे बाली 
मई 2021 में वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश भर में कांग्रेस पार्टी ने होर्डिंग लगाए। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर, पूर्व मंत्री जीएस बाली, शिमला शहरी कांग्रेस के अध्यक्ष यशवंत छाजटा आदि के फोटो लगाए गए। इसमें छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह का फोटो नहीं था। इस पर बवाल खड़ा हो गया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व मंत्री जीएस बाली के फोटो बहुत बड़े थे। अन्य राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं के छोटे फोटो लगाए। इस पर वीरभद्र खेमे के कार्यकर्ता भड़क उठे। उन्होंने पोस्टर फाडे़। होर्डिंग में पूर्व मंत्री जीएस बाली के मुंह पर कालिख पोती गई। बाद में पूर्व मंत्री जीएस बाली ने ही यू-टर्न लेते हुए दूसरे होर्डिंग भेजे, जिनमें वीरभद्र सिंह का फोटो तो था, पर उनके अपने फोटो से छोटा था। यह मुद्दा भी काफी विवादित रहा।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed