राजीव भवन का बिल भरा नहीं जा रहा, दिल्ली को मदद दे रहे कांग्रेसी
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प्रदेश के कांग्रेसियों को प्रदेश कांग्रेस की नहीं, दिल्ली की चिंता है। राज्य में कांग्रेस के कई विधायकों, पूर्व विधायकों और अन्य नेताओं की ओर से दिल्ली को आर्थिक मदद दी जा रही है, मगर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को पार्टी फंड नहीं दिया जा रहा है।
उधर, नगर निगम शिमला राजीव भवन शिमला का बिल तैयार कर चुका है। मगर इसे कैसे चुकता करना है? इससे प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिंता में है। कांग्रेस को इसी महीने संपत्ति कर के करीब दो लाख रुपये देने होंगे। इसमें 10 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है।
माना जा रहा है कि नगर निगम शिमला इस महीने के अंत तक संबंधित बिल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को थमा सकता है। मालूम रहे कि प्रदेश कांग्रेस ने पिछले साल के अंत में ही पिछले पांच-छह साल का प्रापर्टी टैक्स एक साथ चुकता किया था।
हर साल पार्टी को बिल के बाद बिल थमाए जा रहे थे, मगर पार्टी इसे चुकाने की स्थिति में नहीं थी। बाद में तो कांग्रेस को नगर निगम शिमला के नोटिस तक झेलने पड़े।
प्रदेश में बेशक उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी, उस समय भी बहुत कम पार्टी फंड आ रहा था। जब विधानसभा चुनाव आए तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने टिकट के आवेदकों से अच्छी-खासी फीस लेने का फैसला लिया।
मैं एक लाख दूंगा, अन्य नेताओं से भी अपील करेंगे
सैकड़ों टिकट आवेदनों पर लाखों रुपये इकट्ठा किए गए और इसके बाद ही सालों से लंबित संपत्ति कर दिया गया। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी का कोष दोबारा खाली हो चुका है। कांग्रेस कार्यालय में काम कर रहे कर्मचारियों के खर्चे निकालने तक मुश्किल हो गए हैं।
टैक्स देना बाद की बात है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पास पैसे नहीं हैं। यह सही है कि प्रापर्टी टैक्स देने की भी चिंता है।
कार्यालय और यहां के कर्मचारियों के खर्चे अलग से हैं। सुक्खू बोले - मैं अपनी तनख्वाह से एक लाख रुपये दूंगा और अन्य नेताओं से भी इसकी अपील करूंगा कि वे भी पार्टी फंड दें। कांग्रेस के कई नेताओं ने हाल ही में एआईसीसी सम्मेलन में दिल्ली में भी योगदान दिया है। उम्मीद है कि वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी देंगे।